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मंडी में 28 गेटपास कटे, सरकारी एजेंसी के अधिकारी खरीद करने नहीं आए

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 02:05 AM IST
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28 gate passes were issued at the mandi, but officials from the
फोटो 16गेटपास जारी करवाते हुए किसान।संवाद
नारनौल। बाजरा खरीद के पहले ही दिन नई अनाज मंडी में सरकारी खरीद व्यवस्था की पोल खुलती नजर आई। किसान बाजरा लेकर मंडी तो पहुंच गए लेकिन फसल खरीदने वाला कोई नहीं मिला। वीरवार को मंडी में 28 गेटपास जारी किए गए मगर एक भी किसान की फसल की खरीद नहीं हो सकी।
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सरकारी खरीद के लिए किस एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई है, यह तक स्पष्ट नहीं हो पाया। संबंधित एजेंसी के अधिकारी भी मंडी में नहीं पहुंचे। ऐसे में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में बाजरा लेकर दिनभर खरीददार का इंतजार करते रहे।
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सरकारी व्यवस्था के अभाव में किसानों के सामने फसल औने-पौने भाव में बेचने की मजबूरी दिखाई दी। मंडी में व्यापारी 2100 से 2150 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बाजरा खरीद रहे हैं। जबकि सरकार ने बाजरे का बाजार भाव 2300 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करते हुए 600 रुपये भावांतर देने की घोषणा की है। किसानों का कहना है कि जब सरकारी खरीद एजेंसी ही मंडी में मौजूद नहीं है तो भावांतर योजना का लाभ कैसे मिलेगा, यह भी स्पष्ट नहीं है।
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गेटपास के नियमों ने बढ़ाया खर्च

फसल बेचने से पहले गेटपास बनवाने की प्रक्रिया भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी। वाहन के नंबर, आरसी और अन्य नियमों की जांच के चलते कई किसानों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। कुछ किसानों को एक वाहन से बाजरा दूसरे वाहन में लोड करवाकर गेटपास कटवाना पड़ा। किसानों का कहना है कि एक तरफ गेटपास के लिए इतने सख्त नियम हैं, दूसरी तरफ मंडी में फसल खरीदने वाला कोई नहीं है।

सत्यापन अधूरा, भावांतर पर भी संकट

क्षेत्र में कई किसानों की फसल का बाजार सत्यापन अभी तक पूरा नहीं हुआ है। कुछ किसानों का बाजरा आधा सत्यापित हुआ है, जबकि आधा बाकी है। सत्यापन नहीं होने पर किसानों को सरकारी खरीद और भावांतर योजना के लाभ से वंचित होने की चिंता सता रही है।

2 अक्तूबर को मंडी में अवकाश

2 अक्तूबर को मंडी बंद रहेगी। वहीं, वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए प्रवेश द्वार के पास दो ब्रेकर बनाए गए हैं। किसानों ने मांग की है कि खरीद एजेंसी और खरीद प्रक्रिया को तत्काल स्पष्ट किया जाए, ताकि मंडी में फसल लेकर आने के बाद उन्हें खरीददार के लिए इंतजार न करना पड़े।

एमएफएमबी पोर्टल पर 4 एकड़ में बाजरे की फसल का पंजीकरण करवाया था। लेकिन केवल 2 एकड़ क्षेत्र का ही सत्यापन हुआ है। अब 2 एकड़ की फसल पर न तो भावांतर मिलेगा न ही सरकारी खरीद में बेच पाऊंगा।

विनोद कुमार, गांव भूषण खुर्द।

ट्रैक्टर में बाजरा लेकर आया था, कर्मचारियों ने बोला नंबर लिखवा कर लाओ। 300 रुपये में नंबर लिखवाए फिर बोले ओरिजनल आरसी लेकर आओ। जिसके बाद दूसरी किराए की गाड़ी कर उसमें बाजरा लोड करवाया और कुल 1100 रुपये अतिरिक्त लगे तब जाकर गेटपास जारी हुआ। जब मंडी पहुंचे तो सरकारी खरीददार मिले नहीं और व्यापारी कम दाम पर खरीद रहे हैं।


मनोज कुमार, गांव भूषण कलां।

वर्जन :

प्रथम दिन 28 किसानों को गेटपास जारी किए गए। गेटपास उसी वाहन के लिए जारी किए जाएंगे जिस पर नंबर अंकित है। किसानों से अपील है नियमों का पालन करे ताकि परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

नुकुल यादव, सचिव मार्केट कमेटी नारनौल
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