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CG News: मुर्गी और बटेर पालन कर महिला समूह गढ़ रही है अपने भविष्य के सपने, सालाना आमदानी जानकर चौंक जाएंगे
Thu, 21 Nov 2024 05:28 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 21 Nov 2024 05:28 PM IST
सार
नारी शक्ति वह ताकत है, जो अगर कोई संकल्प ले और उसे पूरा करने की बीड़ा उठा लें, तो कामयाबी की राह खुद ब खुद चलकर आती है। महिलाएं अपने हुनर, ताकत और संगठन के दम पर कामयाबी की राह पर निकल पड़ी है।
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मुर्गी और बटेर पालन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के अंतर्गत मोहला की महिलाए संगठन बनाकर बटेर पालन और मुर्गी पालन का व्यवसाय कर रही है। मां बमलेश्वरी गंगा समूह के नाम से ये महिलाएं मुर्गी और बटेर पालन का व्यवसाय कर रही है। ये महिलाएं बिहान समूह से लखपति दीदी बनने के कगार पर अग्रसर है।
समूह की अध्यक्ष फूलवती तारम ने बताया कि उनके साथ समूह में पांच महिलाएं काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले वे अपने घरों तक सीमित थीं। उन्होंने बताया कि वे समूह बनाकर उन्होंने मुर्गी और बटेर पालन का व्यवसाय कर रही हैं। इससे उन्हें सालाना दो से तीन लाख रुपये लाभ मिलता है। समूह के प्रत्येक महिलाओं को प्रति साल 40 से 50 हजार रुपये का आर्थिक आमदनी हो रहा है।
उन्होंने बताया कि पहले वे अपने घरेलू खर्च के लिए दूसरे पर निर्भर रहती थी। ऐसे में उन्होंने बटेर और मुर्गी पालन व्यवसाय करने का निर्णय लिया। शुरुआत में उन्हें इस व्यवसाय का कोई अनुभव नहीं था। उन्होंने बताया कि जनपद पंचायत से संपर्क कर उन्होंने एनआरएलएम योजना से प्रशिक्षण लिया। अब वह काफी अच्छे ढंग से मुर्गी व बटेर पालन का व्यवसाय कर रही हैं। मुर्गी और बटेर पालन के व्यवसाय से उनके घर की आर्थिक आमदनी के स्तर में सुधार हुआ है। अब समूह की सभी महिलाएं काफी खुश हैं।
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समूह की अध्यक्ष फूलवती तारम ने बताया कि उनके साथ समूह में पांच महिलाएं काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले वे अपने घरों तक सीमित थीं। उन्होंने बताया कि वे समूह बनाकर उन्होंने मुर्गी और बटेर पालन का व्यवसाय कर रही हैं। इससे उन्हें सालाना दो से तीन लाख रुपये लाभ मिलता है। समूह के प्रत्येक महिलाओं को प्रति साल 40 से 50 हजार रुपये का आर्थिक आमदनी हो रहा है।
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उन्होंने बताया कि पहले वे अपने घरेलू खर्च के लिए दूसरे पर निर्भर रहती थी। ऐसे में उन्होंने बटेर और मुर्गी पालन व्यवसाय करने का निर्णय लिया। शुरुआत में उन्हें इस व्यवसाय का कोई अनुभव नहीं था। उन्होंने बताया कि जनपद पंचायत से संपर्क कर उन्होंने एनआरएलएम योजना से प्रशिक्षण लिया। अब वह काफी अच्छे ढंग से मुर्गी व बटेर पालन का व्यवसाय कर रही हैं। मुर्गी और बटेर पालन के व्यवसाय से उनके घर की आर्थिक आमदनी के स्तर में सुधार हुआ है। अब समूह की सभी महिलाएं काफी खुश हैं।
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