सिंधिया पर छत्तीसगढ़ के मंत्री ने साधा निशाना, बोले- मैं कभी नहीं बनूंगा भाजपाई
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18 सालों तक कांग्रेस में रहने के बाद बुधवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए हैं। उनके समर्थन में 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है जिससे कमलनाथ सरकार संकट में आ गई है। कांग्रेस के कई नेताओं ने सिंधिया के फैसले का विरोध किया है। वहीं अब छत्तीसगढ़ के मंत्री ने उनपर निशाना साधते हुए कहा कि वह भाजपा में इसलिए शामिल हुए क्योंकि उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।
छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने कहा, 'लोग दावा कर सकते हैं लेकिन मैं कभी भाजपा में शामिल नहीं होउंगा। यदि मुझे 100 जिंदगियां भी मिलती हैं तो भी मैं उस विचारधारा के साथ नहीं जाउंगा। एक शख्स जिसे मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया इसलिए वह भाजपा में शामिल हो गया। वह कभी भी मुख्यमंत्री नहीं बनेगा।'
TS Singh Deo: A single person doesn't remain as captain forever, Kapil Dev got his chance when Gavaskar was there. Currently Virat Kohli is captain but in T20 there are different captains. Will Kohli join Pakistan's team if he is not made captain? It's beyond understanding(12.03) https://t.co/e7InqGbEj8
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) March 13, 2020
सिंधिया पर तंज कसते हुए देव ने कहा, 'एक अकेला शख्स कभी हमेशा के लिए कैप्टन नहीं बन सकता है। कपिल देव को मौका तब मिला जब गावस्कर वहां मौजूद थे। वर्तमान में विराट कोहली कैप्टन हैं लेकिन टी20 के कैप्टन अलग-अलग हैं। क्या कैप्टन न बनाए जाने पर कोहली पाकिस्तान की टीम में शामिल हो जाएंगे। यह मेरी सोच से परे हैं।'
सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ने की बताई तीन वजहें
भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह का शुक्रिया कि उन्होंने हमें अपने परिवार में स्थान दिया। मेरे जीवन में दो तारीख काफी अहम रही हैं, इनमें पहला 30 सितंबर 2001 जिस दिन मैंने अपने पिता को खोया, वह जिंदगी बदलने वाला दिन है।
दूसरी तारीख 10 मार्च 2020 जो उनकी 75वीं वर्षगांठ थी जहां मैंने जीवन में एक बड़ा निर्णय लिया है। आज मन व्यथित है और दुखी भी है। जो कांग्रेस पहले थी वह आज नहीं रही, उसके तीन मुख्य बिंदु हैं। पहला कि वास्तविकता से इनकार करना, दूसरा नई विचारधारा और तीसरा नए नेतृत्व को मान्यता नहीं मिलना।