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नवरात्रि: सरगुजा राजपरिवार के मुखिया टीएस सिंहदेव ने मां महामाया मंदिर में की संधि पूजा, दो घंटे बंद रहे दर्शन
Mon, 19 Oct 2026 04:46 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सरगुजा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सरगुजा
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 19 Oct 2026 04:46 PM IST
सार
शारदीय नवरात्र की नवमी पर सरगुजा राजपरिवार के मुखिया टीएस सिंहदेव ने मां महामाया मंदिर में परंपरागत संधि पूजा कर कुष्मांड की बलि अर्पित की। विशेष अनुष्ठान के कारण मंदिर में करीब दो घंटे दर्शन बंद रहे। पूजा के बाद श्रद्धालुओं के लिए कपाट फिर खोल दिए गए।
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टीएस सिंहदेव ने प्रसिद्ध मां महामाया मंदिर में अष्टमी और नवमी की संधि पूजा की।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शारदीय नवरात्र की नवमी पर शक्तिपीठों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इस दौरान सरगुजा राजपरिवार के मुखिया टीएस सिंहदेव ने सोमवार को परंपरा के अनुसार प्रसिद्ध मां महामाया मंदिर में अष्टमी और नवमी की संधि पूजा की। वह सुबह 9:00 बजे मंदिर पहुंचे और मां महामाया की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हुए कुष्मांड की बलि दी।
इस विशेष संधि पूजन के कारण मंदिर लगभग दो घंटे तक श्रद्धालुओं के लिए बंद रहा। पूजन संपन्न होने के बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए दोबारा खोल दिए गए। मां महामाया सरगुजा राजपरिवार की कुलदेवी हैं और इस पूजा का धार्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व माना जाता है।
राजपरिवार की उपस्थिति
इस धार्मिक अनुष्ठान में राजपरिवार के सदस्य आदितेश्वर सिंहदेव सहित राजपरिवार से जुड़े अन्य सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे। महामाया मंदिर के मुख्य पुजारी ने वैदिक मंत्रोचार के साथ संधि पूजा संपन्न कराई। पूजन के बाद टीएस सिंहदेव ने बताया कि उन्होंने परंपरा का निर्वहन करते हुए मां महामाया का पूजन किया और कुष्मांड की बलि अर्पित की। इसके उपरांत वह समलाया मंदिर पहुंचे और वहां भी विधिवत अर्चना की। मान्यता है कि मां महामाया की पूजा के बाद मां समलाया के दर्शन और पूजन के बिना यह अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
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ये भी पढ़ें-छत्तीसगढ़ के इन क्षेत्रों में दशहरे पर नहीं होता रावण दहन: 16वीं सदी से चल रही परंपरा,निकलती है राजा की सवारी
शक्तिपीठों और मंडपों में अनुष्ठान
शहर के अन्य शक्तिपीठों और दुर्गा पंडालों में भी सोमवार को पूरे उत्साह के साथ संधि पूजन आयोजित किया गया। आचार्यों के अनुसार सोमवार को अष्टमी की उदित तिथि होने के कारण संधि पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह लगभग 10:00 बजे था। मां महामाया मंदिर में तड़के 4:00 बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जो दिनभर बनी रहीं। इसके अलावा मां दुर्गा मंदिर गांधी चौक, संत हरकेवल दास मंदिर, वनदेवी सांडबार और शहर के विभिन्न काली मंदिरों में भी विधि-विधान से पूजा संपन्न हुई। मंदिरों तथा पूजा पंडालों में संधि पूजन के साथ-साथ कन्या भोज का भी भव्य आयोजन किया गया।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था
त्योहार के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए। मंदिरों और दुर्गा पंडालों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कई टीमें तैनात की गईं। सुरक्षा के मद्देनजर शहर के विभिन्न मार्गों पर यातायात में बदलाव किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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इस विशेष संधि पूजन के कारण मंदिर लगभग दो घंटे तक श्रद्धालुओं के लिए बंद रहा। पूजन संपन्न होने के बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए दोबारा खोल दिए गए। मां महामाया सरगुजा राजपरिवार की कुलदेवी हैं और इस पूजा का धार्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व माना जाता है।
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राजपरिवार की उपस्थिति
इस धार्मिक अनुष्ठान में राजपरिवार के सदस्य आदितेश्वर सिंहदेव सहित राजपरिवार से जुड़े अन्य सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे। महामाया मंदिर के मुख्य पुजारी ने वैदिक मंत्रोचार के साथ संधि पूजा संपन्न कराई। पूजन के बाद टीएस सिंहदेव ने बताया कि उन्होंने परंपरा का निर्वहन करते हुए मां महामाया का पूजन किया और कुष्मांड की बलि अर्पित की। इसके उपरांत वह समलाया मंदिर पहुंचे और वहां भी विधिवत अर्चना की। मान्यता है कि मां महामाया की पूजा के बाद मां समलाया के दर्शन और पूजन के बिना यह अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
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शक्तिपीठों और मंडपों में अनुष्ठान
शहर के अन्य शक्तिपीठों और दुर्गा पंडालों में भी सोमवार को पूरे उत्साह के साथ संधि पूजन आयोजित किया गया। आचार्यों के अनुसार सोमवार को अष्टमी की उदित तिथि होने के कारण संधि पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह लगभग 10:00 बजे था। मां महामाया मंदिर में तड़के 4:00 बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जो दिनभर बनी रहीं। इसके अलावा मां दुर्गा मंदिर गांधी चौक, संत हरकेवल दास मंदिर, वनदेवी सांडबार और शहर के विभिन्न काली मंदिरों में भी विधि-विधान से पूजा संपन्न हुई। मंदिरों तथा पूजा पंडालों में संधि पूजन के साथ-साथ कन्या भोज का भी भव्य आयोजन किया गया।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था
त्योहार के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए। मंदिरों और दुर्गा पंडालों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कई टीमें तैनात की गईं। सुरक्षा के मद्देनजर शहर के विभिन्न मार्गों पर यातायात में बदलाव किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।