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CG: बालोद में युवा उद्यमियों का हुआ प्रशिक्षण, टीम ने कहा- आयात पर कम, निर्यात पर ज्यादा करें फोकस
Thu, 15 Feb 2024 08:30 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
Published by: श्याम जी.
Updated Thu, 15 Feb 2024 08:30 PM IST
सार
भारत सरकार वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा फॉर्मर प्रोड्यूसर्स राइस मिलर्स आईसी होल्डर्स स्थानीय उद्यमियों और एफपीओ को प्रशिक्षण दिया गया। फॉरेन ट्रेड में केंद्र सरकार निर्यात बंधु स्कीम के तहत उद्यमियों को न केवल विभिन्न प्रकार की सब्सिडी और छूट दे रही है।
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प्रशिक्षण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बालोद जिले में एक्सपर्ट रीच को लेकर उद्यमियों ने उत्साहा दिखाया है। यहां वनोपज से लेकर धान, इमली महुआ ऐसे प्रोडक्ट हैं, जिसे विदेशों में एक्सपोर्ट किया जा सकता है। यहां पर बेहतर प्रदर्शन और मार्केट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। भारत सरकार वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा आज फॉर्मर प्रोड्यूसर्स राइस मिलर्स आईसी होल्डर्स स्थानीय उद्यमियों और एफपीओ को प्रशिक्षण दिया गया। फॉरेन ट्रेड में केंद्र सरकार निर्यात बंधु स्कीम के तहत उद्यमियों को न केवल विभिन्न प्रकार की सब्सिडी और छूट दे रही है।
प्रशिक्षण दे रही डीजीएफटी टीम ने बताया कि विदेशों में बालोद जिले का सामान जाए। हम आयत पर निर्भर कम हों और निर्यात पर फोकस ज्यादा करें, इस बात को लेकर यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इमली, महुआ जो यहां सामान्य चीज हैं इसका विदेशों में उम्दा कीमतों के साथ व्यापार कर सकते हैं। डीजीएफटी नागपुर द्वारा कस्टम की प्रक्रिया-बिल ऑफ एण्ट्री, शिपिंग बिल, इंटरनेशनल कामर्शियल टर्म, रोल ऑफ कस्टम हाउस एजेंट आदि के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
सोनाली मोराई ने बताया कि भारत सरकार विदेश में निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए फॉरेन ट्रेड पॉलिसी का निर्माण करती है। इसके जरिए विभिन्न सेक्टर के उद्योगों को वैश्विक स्तर में व्यापार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहयोग दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बालोद में सुदृढ़ औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर है।जल और खनिज संसाधन के साथ यहां कृषि व उद्यानिकीए हैंडीक्राफ्ट हैंडलूमए कोसा वस्त्रए झारा शिल्प के क्षेत्र में निर्यात की अच्छी संभावनाएं हैं। अत: निर्यात के लिए अनुकूल मार्केट तलाश कर वहां निर्यात शुरू किया जा सकता है। इससे मुनाफा बढ़ेगा और मार्केट डायवर्सिफिकेशन के कारण सिर्फ एक तरह के बाजार पर निर्भरता का रिस्क कम होगा।
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प्रशिक्षण दे रही डीजीएफटी टीम ने बताया कि विदेशों में बालोद जिले का सामान जाए। हम आयत पर निर्भर कम हों और निर्यात पर फोकस ज्यादा करें, इस बात को लेकर यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इमली, महुआ जो यहां सामान्य चीज हैं इसका विदेशों में उम्दा कीमतों के साथ व्यापार कर सकते हैं। डीजीएफटी नागपुर द्वारा कस्टम की प्रक्रिया-बिल ऑफ एण्ट्री, शिपिंग बिल, इंटरनेशनल कामर्शियल टर्म, रोल ऑफ कस्टम हाउस एजेंट आदि के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
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सोनाली मोराई ने बताया कि भारत सरकार विदेश में निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए फॉरेन ट्रेड पॉलिसी का निर्माण करती है। इसके जरिए विभिन्न सेक्टर के उद्योगों को वैश्विक स्तर में व्यापार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहयोग दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बालोद में सुदृढ़ औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर है।जल और खनिज संसाधन के साथ यहां कृषि व उद्यानिकीए हैंडीक्राफ्ट हैंडलूमए कोसा वस्त्रए झारा शिल्प के क्षेत्र में निर्यात की अच्छी संभावनाएं हैं। अत: निर्यात के लिए अनुकूल मार्केट तलाश कर वहां निर्यात शुरू किया जा सकता है। इससे मुनाफा बढ़ेगा और मार्केट डायवर्सिफिकेशन के कारण सिर्फ एक तरह के बाजार पर निर्भरता का रिस्क कम होगा।
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