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Kanker: मेहमान बन गया मोर, भा गया ये गांव, परिवार के सदस्य की तरह रखते हैं ग्रामीण,हर घर से मिलता है दाना-पानी

Fri, 07 Apr 2023 03:23 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कांकेर
अमर उजाला नेटवर्क, कांकेर Published by: ललित कुमार सिंह Updated Fri, 07 Apr 2023 03:23 PM IST
सार

कहते हैं कब, किसको, किससे प्रेम हो जाए कहा नहीं जा सकता। आदमी तो आदमी पशु-पक्षी भी प्रेम के भूखे होते हैं। बस इन्हें पहचानने वाला चाहिए। कुछ ऐसा ही देखने को मिला है छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के एक गांव में। 'जंगल में मोर नाचा किसने देखा...' ये कहावत खड़कागांववासियों पर सटीक बैठती है। 

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This village of Kanker fell in love with peacock In chhattisgarh
खड़ाकागांव का मेहमान बन गया मोर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

कहते हैं कब, किसको, किससे प्रेम हो जाए कहा नहीं जा सकता। आदमी तो आदमी पशु-पक्षी भी प्रेम के भूखे होते हैं। बस इन्हें पहचानने वाला चाहिए। कुछ ऐसा ही देखने को मिला है छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के एक गांव में। 'जंगल में मोर नाचा किसने देखा...' ये कहावत खड़कागांववासियों पर सटीक बैठती है। 
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घनघोर सूनसान जंगल में नाचने वाला मोर यहां लोगों के बीच निर्भिक होकर अपना पंख फैलाकर नाचता रहता है। राष्ट्रीय पक्षी मोर आमतौर पर जंगल या फिर चिड़ियाघरों में देखने को मिलता है, लेकिन भानबेड़ा के खड़कागांव गांव को ही मोर ने अपना बसेरा बना लिया है। 
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गलियों में बेरोकटोक विचरण
घरों की मुंडेर और गलियों में बेरोकटोक घूमता है। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ साल पहले मोर जंगल से भटक कर गांव पहुंचा और कभी वापस नहीं लौटा। अब मोर और ग्रामीणों के बीच गहरी दोस्ती हो चुकी है। मोर की मौजूदगी के कारण ये खड़ाकागांव  सुर्खियों में है, इस खूबसूरत मोर को करीब से देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। गांव के लोग इसका पूरा ख्याल रखते हैं। अब ये मोर ग्रामीणों के परिवार की सदस्य की तरह रहता है। वन विभाग की ओर से भी मोर की सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है।
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खड़ाकागांव की खूबसूरती को राष्ट्रीय पक्षी ने बढ़ा
पहाड़ी और घने जंगल से घिरे खड़ाकागांव की खूबसूरती को राष्ट्रीय पक्षी मोर ने और बढ़ा दिया है। करीब पांच साल पहले घने जंगल से भटक ये मोर रिहायशी इलाके में पहुंचा। उस वक्त ये काफी छोटा था। ग्रामीणों ने इसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि इसके दानापानी की व्यवस्था कराई। 


गांव का मेहमान बन गया मोर
ग्रामीणों के इस व्यवहार को देखकर ये मोर गांव में रुक गया, तब से ये खूबसूरत मोर गांव की शोभा बढ़ा रहा है। मोर गांव की गलियों में आराम से घूमता रहता है। जब भूख लगती है तो गांव के किसी के घर में घुस जाता है। गांव के आदिवासी ग्रामीण भी इसके इशारे को समझ जाते है। भर पेट दाना चुंगने के बाद मोर गांव की सैर पर निकल जाता है। सुबह और शाम के वक्त बीच चौराहे पर जब अपने पंख को फैलाकर झूमता है, उस दौरान इसे देखने के लिए भीड़ लग जाती है।  
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