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Raipur News: सीएम साय ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को किया नमन, बोले- उनका जीवन राष्ट्रसेवा और त्याग का प्रतीक
Mon, 06 Jul 2026 11:27 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Mon, 06 Jul 2026 11:27 PM IST
सार
CM sai on Syama Prasad Mukherjee 125th birth anniversary: छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदेश स्तरीय समारोह में उन्हें नमन किया।
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सीएम साय का सम्मान करते कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल
- फोटो : Amar ujala digital
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विस्तार
CM sai on Syama Prasad Mukherjee 125th birth anniversary: छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदेश स्तरीय समारोह में उन्हें नमन किया। इस दौरान सीएम साय ने कहा कि मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, शिक्षा, त्याग और अखंड भारत के संकल्प का अद्वितीय उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आज डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। धारा 370 का हटना, अंत्योदय की भावना पर आधारित विकास और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने वाले अनेक निर्णय उनके विचारों को मूर्त रूप देने वाले ऐतिहासिक कदम हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए राज्य के सभी संभागीय एवं जिला मुख्यालयों में उनकी प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके लिए 10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक दूरदर्शी राजनेता ही नहीं, बल्कि विलक्षण शिक्षाविद भी थे। मात्र 33 वर्ष की आयु में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने का गौरव प्राप्त करने वाले डॉ. मुखर्जी ने स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की उनकी प्रतिबद्धता ऐसी थी कि उन्होंने सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना स्वीकार किया।
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उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 'एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान' की व्यवस्था के विरुद्ध डॉ. मुखर्जी ने ऐतिहासिक संघर्ष किया और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आज पूरा देश उनके त्याग और राष्ट्रनिष्ठा को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करता है।
साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के गौरवशाली इतिहास और भूले-बिसरे स्वतंत्रता सेनानियों को उचित सम्मान दिलाने का कार्य किया है। हर घर तिरंगा जैसे जनआंदोलन ने राष्ट्रभक्ति की भावना को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने भी नया रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के 14 वीर स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में विशेष दीर्घा स्थापित की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अंत्योदय के विचारों को आधार बनाकर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में मोदी की गारंटी के अधिकांश संकल्प पूरे किए गए हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। 500 से अधिक गांवों तक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है, 700 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं तथा बस्तर अंचल में व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार अभियान संचालित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रसेवा, शिक्षा, त्याग और समर्पण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इस अवसर पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र कुमार पटेल, प्रबुद्धजन, शिक्षक, छात्र-छात्राएं आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आज डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। धारा 370 का हटना, अंत्योदय की भावना पर आधारित विकास और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने वाले अनेक निर्णय उनके विचारों को मूर्त रूप देने वाले ऐतिहासिक कदम हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए राज्य के सभी संभागीय एवं जिला मुख्यालयों में उनकी प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके लिए 10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक दूरदर्शी राजनेता ही नहीं, बल्कि विलक्षण शिक्षाविद भी थे। मात्र 33 वर्ष की आयु में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने का गौरव प्राप्त करने वाले डॉ. मुखर्जी ने स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की उनकी प्रतिबद्धता ऐसी थी कि उन्होंने सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना स्वीकार किया।
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उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 'एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान' की व्यवस्था के विरुद्ध डॉ. मुखर्जी ने ऐतिहासिक संघर्ष किया और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आज पूरा देश उनके त्याग और राष्ट्रनिष्ठा को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण करता है।
साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के गौरवशाली इतिहास और भूले-बिसरे स्वतंत्रता सेनानियों को उचित सम्मान दिलाने का कार्य किया है। हर घर तिरंगा जैसे जनआंदोलन ने राष्ट्रभक्ति की भावना को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने भी नया रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के 14 वीर स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में विशेष दीर्घा स्थापित की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अंत्योदय के विचारों को आधार बनाकर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में मोदी की गारंटी के अधिकांश संकल्प पूरे किए गए हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। 500 से अधिक गांवों तक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है, 700 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं तथा बस्तर अंचल में व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार अभियान संचालित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रसेवा, शिक्षा, त्याग और समर्पण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इस अवसर पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र कुमार पटेल, प्रबुद्धजन, शिक्षक, छात्र-छात्राएं आदि मौजूद रहे।