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छत्तीसगढ़: स्कूलों में अनिवार्य रूप से लगेंगे शुगर और कैलोरी बोर्ड, जंक फूड पर रोक की सिफारिश
Tue, 06 Oct 2026 03:34 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 06 Oct 2026 03:34 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्कूलों में शुगर और कैलोरी जागरूकता बोर्ड लगाने की सिफारिश की है। बोर्ड पर लाल, पीला और हरा रंगों के जरिए बच्चों को खाद्य पदार्थों में मौजूद शक्कर, नमक और कैलोरी की जानकारी दी जाएगी।
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छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बच्चों में बढ़ते मोटापे और मधुमेह के खतरे को रोकने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बड़ी पहल की है। आयोग ने प्रदेश के सभी शासकीय और निजी विद्यालयों के साथ-साथ आवासीय आश्रम शालाओं तथा छात्रावासों में अनिवार्य रूप से शुगर एवं कैलोरी जागरूकता बोर्ड लगाने की अनुशंसा की है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों के बीच दैनिक खान-पान को लेकर सही जागरूकता फैलाना और उन्हें जंक फूड के खतरों से बचाना है।
ट्रैफिक लाइट सिस्टम से होगी पहचान
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के अनुसार बच्चों में जंक फूड, मीठे पेय पदार्थों और पैकेटबंद खाद्य सामग्री का सेवन लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केवल खान-पान पर रोक लगाने के बजाय बच्चों और उनके अभिभावकों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना अधिक प्रभावी सिद्ध होगा। प्रस्तावित जागरूकता बोर्ड के माध्यम से विभिन्न खाद्य पदार्थों में मौजूद शक्कर, नमक और कैलोरी की मात्रा को अत्यंत सरल तथा दृश्य तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा।
जानकारी को बच्चों के लिए अधिक सुगम बनाने के लिए बोर्ड पर लाल, पीला और हरा रंग आधारित ट्रैफिक लाइट सिस्टम अपनाने का सुझाव दिया गया है। इस व्यवस्था के जरिये बच्चे सरलता से यह समझ सकेंगे कि कौन से खाद्य पदार्थ सीमित मात्रा में खाने चाहिए और कौन से विकल्प उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए अधिक बेहतर हैं।
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ईट राइट क्लब और स्वास्थ्य एंबेसडर
बाल आयोग ने अपने सुझावों में स्कूल परिसरों के भीतर जंक फूड की बिक्री को पूरी तरह नियंत्रित करने पर विशेष बल दिया है। इसके स्थान पर स्थानीय और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। विद्यार्थियों के बीच पोषण से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों में 'ईट राइट क्लब' के गठन और छात्रों को 'छात्र स्वास्थ्य एंबेसडर' बनाए जाने का सुझाव दिया गया है।
आयोग ने यह भी व्यवस्था दी है कि विद्यालयों में दैनिक प्रार्थना सभा के दौरान पोषण तथा स्वस्थ खान-पान से संबंधित विशेष जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं। इससे बच्चों को बचपन से ही अच्छी आदतों को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने की प्रेरणा मिलेगी।
आश्रम शालाओं और बैठकों में चर्चा
आयोग ने इस स्वास्थ्य पहल के दायरे में केवल सामान्य स्कूलों को ही नहीं रखा है, बल्कि पोटा केबिन, प्रयास, एकलव्य विद्यालयों और अन्य सभी आवासीय आश्रम शालाओं को भी इसमें शामिल किया है। इन सभी आवासीय संस्थानों में नियमित भोजन सारणी के साथ ही अनिवार्य रूप से शुगर एवं कैलोरी बोर्ड लगाए जाने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही वहां रहने वाले विद्यार्थियों को दैनिक आहार में स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है।
बच्चों के खान-पान की आदतों में टिकाऊ सुधार लाने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता को अत्यंत आवश्यक माना गया है। आयोग की अनुशंसा के अनुसार पालक-शिक्षक बैठकों में पोषण, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली पर नियमित रूप से चर्चा की जाएगी। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सराहनीय प्रयास करने वाले अभिभावकों को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था विकसित करने की बात भी कही गई है।
संबंधित विभागों को इन सभी अनुशंसाओं के अनुरूप शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने और की गई कार्यवाही से आयोग को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। बाल आयोग का मुख्य उद्देश्य बच्चों को कुपोषण, बाल-मोटापे और मधुमेह जैसी समस्याओं से बचाकर बचपन से ही स्वस्थ जीवनशैली विकसित करना है।
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ट्रैफिक लाइट सिस्टम से होगी पहचान
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के अनुसार बच्चों में जंक फूड, मीठे पेय पदार्थों और पैकेटबंद खाद्य सामग्री का सेवन लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केवल खान-पान पर रोक लगाने के बजाय बच्चों और उनके अभिभावकों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना अधिक प्रभावी सिद्ध होगा। प्रस्तावित जागरूकता बोर्ड के माध्यम से विभिन्न खाद्य पदार्थों में मौजूद शक्कर, नमक और कैलोरी की मात्रा को अत्यंत सरल तथा दृश्य तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा।
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जानकारी को बच्चों के लिए अधिक सुगम बनाने के लिए बोर्ड पर लाल, पीला और हरा रंग आधारित ट्रैफिक लाइट सिस्टम अपनाने का सुझाव दिया गया है। इस व्यवस्था के जरिये बच्चे सरलता से यह समझ सकेंगे कि कौन से खाद्य पदार्थ सीमित मात्रा में खाने चाहिए और कौन से विकल्प उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए अधिक बेहतर हैं।
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ईट राइट क्लब और स्वास्थ्य एंबेसडर
बाल आयोग ने अपने सुझावों में स्कूल परिसरों के भीतर जंक फूड की बिक्री को पूरी तरह नियंत्रित करने पर विशेष बल दिया है। इसके स्थान पर स्थानीय और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। विद्यार्थियों के बीच पोषण से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों में 'ईट राइट क्लब' के गठन और छात्रों को 'छात्र स्वास्थ्य एंबेसडर' बनाए जाने का सुझाव दिया गया है।
आयोग ने यह भी व्यवस्था दी है कि विद्यालयों में दैनिक प्रार्थना सभा के दौरान पोषण तथा स्वस्थ खान-पान से संबंधित विशेष जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं। इससे बच्चों को बचपन से ही अच्छी आदतों को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने की प्रेरणा मिलेगी।
आश्रम शालाओं और बैठकों में चर्चा
आयोग ने इस स्वास्थ्य पहल के दायरे में केवल सामान्य स्कूलों को ही नहीं रखा है, बल्कि पोटा केबिन, प्रयास, एकलव्य विद्यालयों और अन्य सभी आवासीय आश्रम शालाओं को भी इसमें शामिल किया है। इन सभी आवासीय संस्थानों में नियमित भोजन सारणी के साथ ही अनिवार्य रूप से शुगर एवं कैलोरी बोर्ड लगाए जाने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही वहां रहने वाले विद्यार्थियों को दैनिक आहार में स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है।
बच्चों के खान-पान की आदतों में टिकाऊ सुधार लाने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता को अत्यंत आवश्यक माना गया है। आयोग की अनुशंसा के अनुसार पालक-शिक्षक बैठकों में पोषण, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली पर नियमित रूप से चर्चा की जाएगी। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सराहनीय प्रयास करने वाले अभिभावकों को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था विकसित करने की बात भी कही गई है।
संबंधित विभागों को इन सभी अनुशंसाओं के अनुरूप शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने और की गई कार्यवाही से आयोग को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। बाल आयोग का मुख्य उद्देश्य बच्चों को कुपोषण, बाल-मोटापे और मधुमेह जैसी समस्याओं से बचाकर बचपन से ही स्वस्थ जीवनशैली विकसित करना है।