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नक्सलवाद से हुनर की ओर: कभी बहाते थे खून... अब ले रहे कौशल विकास का प्रशिक्षण, सरेंडर के बाद बदल रही जिंदगी

Sun, 13 Apr 2025 11:54 AM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: श्याम जी. Updated Sun, 13 Apr 2025 11:54 AM IST
सार

बस्तर, खासकर बीजापुर, एक समय नक्सलवाद का गढ़ माना जाता था। अब सरेंडर करने वाले नक्सलियों के लिए सरकार विशेष प्रयास कर रही है, ताकि वे बेरोजगारी के कारण दोबारा उसी दलदल में न लौटें। प्रशिक्षण शिविरों में 90 लोगों के बैच में पहले चरण का प्रशिक्षण शुरू किया गया है।

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Skill development training is being provided to surrendered Naxalites in Bastar division
राजमिस्त्री का प्रशिक्षण लेते हुए पूर्व नक्सली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बस्तर संभाग में एक समय बंदूक थामे जंगलों में खून-खराबा करने वाले पूर्व नक्सली आज हुनरमंद बनकर नई जिंदगी जी रहे हैं। सरेंडर के बाद ये लोग आत्मनिर्भर बन रहे हैं और अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा में सरकार द्वारा संचालित विशेष प्रशिक्षण शिविरों में 90-90 लोगों के बैच में पूर्व नक्सलियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन शिविरों में प्रशिक्षण ले रहे लोग अपने अतीत पर पछतावा जताते हुए वर्तमान से संतुष्ट नजर आते हैं।

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पूर्व पीएलजीए सदस्य सुकराम बताते हैं, "मैं पहले दूसरे राज्य में मजदूरी करता था। नक्सलियों ने मेरे परिवार को परेशान किया, जिसके चलते मजबूरी और जोश में मैं संगठन में शामिल हो गया। खून-खराबा किया, लेकिन बाद में समझ आया कि यह गलत है। मैंने सरेंडर किया और अब राजमिस्त्री का प्रशिक्षण ले रहा हूं।" सुकराम जैसे कई युवा परिवार की सुरक्षा और अन्य मजबूरियों के चलते नक्सलवाद में शामिल हुए थे, जो अब इन शिविरों में नई राह तलाश रहे हैं।

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Skill development training is being provided to surrendered Naxalites in Bastar division
कौशल विकास का प्रशिक्षण लेते हुए पूर्व नक्सली - फोटो : अमर उजाला

कौशल विकास और रोजगार पर जोर
सरकार इन पूर्व नक्सलियों को उनकी रुचि के अनुसार ट्रेड सिखा रही है, ताकि उन्हें भविष्य में आसानी से रोजगार मिल सके। आइटीआइ और लाइवलीहुड मिशन के तहत राजमिस्त्री, खेती-किसानी, पशुपालन, मछली पालन जैसे कौशल सिखाए जा रहे हैं। प्रशिक्षण के साथ-साथ एक्सपोजर विजिट भी करवाई जा रही हैं, जहां ये लोग विभिन्न जिलों के संस्थानों में जाकर व्यवसायों को करीब से समझ रहे हैं।

नक्सलवाद से हुनर की ओर
बस्तर, खासकर बीजापुर, एक समय नक्सलवाद का गढ़ माना जाता था। अब सरेंडर करने वाले नक्सलियों के लिए सरकार विशेष प्रयास कर रही है, ताकि वे बेरोजगारी के कारण दोबारा उसी दलदल में न लौटें। प्रशिक्षण शिविरों में 90 लोगों के बैच में पहले चरण का प्रशिक्षण शुरू किया गया है। यहां सुबह पांच बजे योग से दिन की शुरुआत होती है, फिर दिनभर विभिन्न ट्रेड की ट्रेनिंग दी जाती है। साक्षर भारत कार्यक्रम के तहत पढ़ाई, टीवी देखने का समय और शाम को खेलकूद का आयोजन भी किया जाता है।

Skill development training is being provided to surrendered Naxalites in Bastar division
कौशल विकास का प्रशिक्षण लेते हुए पूर्व नक्सली - फोटो : अमर उजाला
पछतावे से नई शुरुआत तक
इन शिविरों में ऐसे पूर्व नक्सली भी शामिल हैं, जो कभी बम बनाने और हथियार चलाने जैसे कामों में लिप्त थे। अब वे खेती, पशुपालन और अन्य रोजगारपरक कौशल सीख रहे हैं। सरकार का उद्देश्य इन्हें जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक बनाना है। प्रशिक्षण ले रहे पूर्व नक्सलियों का कहना है कि बंदूक छोड़ने के बाद उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया है।
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