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कोरबा: वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह पर स्कूली बच्चों को मिला जागरूकता का संदेश
Wed, 08 Oct 2025 06:23 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Wed, 08 Oct 2025 06:23 PM IST
सार
कोरबा जिले में 71वें वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह के अवसर पर सेंट जेवियर स्कूल और न्यू ऐरा पब्लिक स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी, WWF इंडिया और कोरबा वन मंडल के सहयोग से किया गया।
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वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह पर स्कूली बच्चों को मिला जागरूकता का संदेश
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरबा जिले में 71वें वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह के अवसर पर सेंट जेवियर स्कूल और न्यू ऐरा पब्लिक स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी, WWF इंडिया और कोरबा वन मंडल के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उप वनमंडलाधिकारी आशिष खेलेवार और तोषी वर्मा ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि “वन्य जीव केवल जंगल की शोभा नहीं, बल्कि पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन के रक्षक हैं।”
Nova Nature Welfare Society के अध्यक्ष एम. सूरज ने बाघ, वन भैंसे, मानव-हाथी द्वंद और किंग कोबरा संरक्षण पर जानकारी दी। वहीं डॉ. फैज़ बॉक्स (कलिंगा यूनिवर्सिटी, रायपुर) ने आर्द्रभूमि को पृथ्वी की “किडनी” बताते हुए उनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
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कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वन्य जीव संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में कार्यक्रम का समापन “प्रकृति से प्रेम करो, तभी धरती सुरक्षित रहेगी” संदेश के साथ किया गया।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उप वनमंडलाधिकारी आशिष खेलेवार और तोषी वर्मा ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि “वन्य जीव केवल जंगल की शोभा नहीं, बल्कि पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन के रक्षक हैं।”
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Nova Nature Welfare Society के अध्यक्ष एम. सूरज ने बाघ, वन भैंसे, मानव-हाथी द्वंद और किंग कोबरा संरक्षण पर जानकारी दी। वहीं डॉ. फैज़ बॉक्स (कलिंगा यूनिवर्सिटी, रायपुर) ने आर्द्रभूमि को पृथ्वी की “किडनी” बताते हुए उनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
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कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वन्य जीव संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में कार्यक्रम का समापन “प्रकृति से प्रेम करो, तभी धरती सुरक्षित रहेगी” संदेश के साथ किया गया।