जज्बे की कहानी, उधार के जूतों पर हासिल कप्तानी

अमर उजाला, नई दिल्‍ली Updated Thu, 23 Jan 2014 04:25 PM IST
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छत्तीसढ़ के भिलाई में रहने वाली रिया वर्मा आज भारतीय जूनियर महिला बास्केटबॉल टीम की कप्तान हैं।

सात बहनों में सबसे बड़ी रिया का परिवार इतना गरीब है कि बास्केटबॉल के लिए जरूरी महंगे जूते तो क्या उसके लिए कभी ढंग का लोअर तक नहीं खरीद पाया। लेकिन होनहार रिया अलग ही मिट्टी की बनी हैं।

सीजीखबर के मुताबिक रिया को बास्केटबाल के प्रति इस कदर दिवानगी थी कि उसने अपनी सहेलियों से जूते और लोअर उधार लेकर भी अपना खेलना जारी रखा।

उसकी प्रतिभा को देखते हुए भिलाई इस्पात संयत्र ने उसे दो वर्ष पहले अपनी बास्केटबॉल अकादमी में शामिल कर लिया।

भिलाई इस्पात संयत्र बास्केटबाल अकदामी में पांच वर्षो की कड़ी मेहनत के बाद रिया आज देश का नाम रोशन कर रही हैं।

भिलाई में रिया का दो कमरे का घर एक छोटी सी तंग गली में है, जहां वह अपने माता-पिता और बहनों के साथ रहती हैं।

बास्केटबॉल्र अकादमी की वजह से हफ्ते में सिर्फ रविवार को ही वह अपने परिवार के साथ रह पाती हैं, शेष छह दिन रिया बास्केटबाल के प्रशिक्षक राजेश पटेल की अकादमी में ही प्रशिक्षण लेते हुए व्यतीत करती हैं, और निरंतर अपने खेल में निखार लाने के लिए कड़ी मेहनत करती हैं।

स्टील सिटी के ही महर्षि दयानंद आर्य उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर-6 में कक्षा 10 में अध्ययनरत रिया बताती हैं कि पांच वर्ष पहले जब उन्होंने अपनी सहेलियों के साथ बास्केटबाल खेलना शुरू किया तो उनके पास न तो जूते थे और न ही खेल के लिए उपयुक्त लोअर।

रिया ने बताया कि उन्होंने अपनी एक सहेली से जूते, लोअर उधार लेकर खेलना शुरू किया। लेकिन एक बार बास्केटबाल को हाथ लगाने के बाद रिया ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

रिया की मां ज्योतिका ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब रिया बाहर खेलने जाती हैं। रिया जब बाहर होने वाले खेल आयोजनों में हिस्सा लेने जातीं तो, पड़ोसियों से उधार लेकर किसी तरह रिया की मां अपनी बेटी के पाकेट खर्च का इंतजाम करतीं। बाद में किसी तरह धीरे-धीरे वह उधार चुकाती जातीं।

भारतीय अंडर-16 महिला बास्केटबाल टीम की कप्तान 15 वर्षीय रिया ने बताया कि वह दो वर्ष से अकादमी में हैं। यहां उन्हें आहार और खेल में लगने वाला किट अकादमी से मिल जाता है।

रिया ने बताया कि इससे उनके पिता दिलीप वर्मा और परिवार को कुछ राहत मिली है। बहरहाल रिया की मेहनत और सफलता का सफर अभी रुका नहीं है और राष्ट्रीय सीनियर महिला बास्केटबाल टीम में जगह बनाने की महत्वाकांक्षा लिए रिया खूब मेहनत कर अपनी प्रतिभा को और निखारने में लगी हैं।

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