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साढ़े सात हजार करोड़ का धान खुले में

Tue, 12 Feb 2013 02:49 PM IST
रायपुर/इंटरनेट डेस्क
रायपुर/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 12 Feb 2013 02:49 PM IST
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rice of seven and a half million price kept in open

राज्य में करीब 52 लाख मीट्रिक टन धान खुले आसमान में पड़ा है। इस धान की कीमत करीब साढ़े सात हजार करोड़ रूपये है। मार्कफेड द्वारा धान को सुरक्षित रखने के पूरे इंतजाम न होने और मौसम बदलने के चलते काफी अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। धान बचने की वजह संग्रहण केंद्रों से परिवहन की उचित व्यवस्था न होना और राइस मिलर्स व भारतीय खाद्य निगम के बीच विवाद को भी बताया जा रहा है।

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राज्य सरकार द्वारा किसानों से इस साल 66.99 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है। अगर तेजी गति से कस्टम मिलिंग की जाती है तो इस साल करीब ढाई से तीन लाख टन धान बचाया जा सकेगा। इसकी कीमत लगभग तीन हजार करोड़ होगी। लेकिन लापरवाही बरतने से राज्य सरकार को भी काफी क्षति का सामना करना पड़ेगा। 
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धान का चावल बनाकर कस्टम मिलिंग के लिए एफसीआई में शुरू से ही दिक्कतें आ रही हैं। परिवहन व्यवस्था ठीक नहीं है। लिहाजा 66.99 हजार मीट्रिक टन खरीदे गए धान में केवल 14.40 मीट्रिक टन धान ही राज्य के मिलरों को मिलिंग के लिए दिया जा सका है। 33.83 टन धान संग्रहण केन्द्रों में जमा कराया गया है। बचा हुआ धान अब भी उपार्जन केन्द्रों में पड़ा हुआ है।
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सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राज्य सरकार प्रतिवर्ष 15 लाख टन चावल का भंडार अपने पास सुरक्षित रखती है। इस तरह अब तक केवल 8 लाख मीट्रिक टन चावल ही जमा हो पाया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में 20 लाख टन चावल जमा हुआ था। इस तरह प्रदेश भर में 52 लाख टन धान आज भी खुले आसमान में रखा है। इसे सुरक्षित रखने कोई उपाय नहीं किए गए हैं। कुछ ही स्थानों पर धूप व बारिश से भीगने की व्यवस्था है।


इस साल की शुरूआत से ही राइस मिलर्स व भारतीय खाद्य निगम के बीच विवाद चला आ रहा है। चावल का लाट निरस्त किए जाने से मिलर्स हड़ताल पर भी चले गए थे। मामले का समाधान करने जांच समिति गठित की गई है। जिससे फरवरी महीने में चावल जमा होने के काम में कुछ तेजी आई है। इस वर्ष धान की कस्टम मिलिंग नहीं होने से राज्य सरकार को करोड़ों का नुकसान होना तय माना जा रहा है।

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