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दूसरी 'निर्भया' इस बार वो थी 'डायन'
आलोक प्रकाश पुतुल
Updated Wed, 18 Dec 2013 10:50 AM IST
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एक ओर देश भर में दिल्ली गैंगरेप के एक साल पूरे होने पर बहस हो रही थी, तो दूसरी ओर छत्तीसगढ के गांव में सामूहिक दुष्कर्म की पीडिता अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए एक थाने से दूसरे थाने भटक रही थी।
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दलित परिवार की इस विवाहित महिला का आरोप है कि उन्होंने हत्या के प्रयास के एक मामले में गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों के खिलाफ अदालत में गवाही दी थी।
पति को रस्सियों से बांधा
महिला को इस अदालती मामले से दूर रहने के लिये तमाम तरह के प्रलोभन दिये गये और दबाव भी बनाया गया। लेकिन महिला गवाही देने से पीछे नहीं हटी। इसके बाद से ही गांव के प्रभावशाली लोग महिला से नाराज थे।
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गवाही के बाद से महिला को तरह-तरह से परेशान करने का सिलसिला शुरु हो गया।
महिला के अनुसार- “गांव भर में यह बात फैला दी गई कि मैं डायन हूं। एक तरह से मेरा सामाजिक बहिष्कार करने की कोशिश की गई।”
रविवार को जब यह महिला अपने पति के साथ बिलासपुर से लौट रही थी तो गांव से बाहर गांव के ही कुछ प्रभावशाली लोगों ने दुर्व्यवहार करना शुरु कर दिया। पति-पत्नी किसी तरह अपने घर पहुंचे।
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कुछ घंटे बाद पीछे से लगभग डेढ दर्जन लोग महिला के घर पहुंचे और महिला के पति को घर में रस्सियों से बांध दिया। इसके बाद वे महिला को खींचते हुये पास की चौपाल पर ले गये।
महिला का आरोप है कि भीड ने वहां उनके कपडे फाडे और उन्हें डायन बता कर उनके सिर के बाल नोचना शुरु किया।
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भीड़ ने किया दुष्कर्म
महिला किसी तरह भीड से बचती हुई गांव के कोटवार (गांव की खबरों को सरकार तक पहुंचाने वाला व्यक्ति) के घर जा कर छिप गई। लेकिन भीड वहां भी जा पहुंची।
इसके बाद भीड में शामिल लोग उन्हें गांव के बाहर ले गये, जहां उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
पीडित महिला के अनुसार सोमवार की सुबह जब उन्हें होश आया तो वे किसी तरह अपने घर पहुंची। इसके बाद पति और दूसरे रिश्तेदारों की मदद से वे बलौदा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंची। लेकिन जब वहां रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई तो वे जिले के पुलिस अधीक्षक के पास गईं।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश के बाद गांव के डेढ दर्जन लोगों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म व टोनही यानी डायन प्रताडना अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।
जिला मुख्यालय के पुलिस उपाधीक्षक सुरेश चौबे के अनुसार-“मामला बेहद संवेदनशील है और हम इस मामले के हरेक पहलू की पडताल कर रहे हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिये पुलिस टीम लगी हुई है।”
लेकिन सरकारी अमले की गंभीरता का आलम ये है कि पीडिता अभी भी चिकित्सकीय परीक्षण के लिये भटक रही है।
जांजगीर-चांपा के सरकारी अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण के बाद चिकित्सकों ने अपनी राय देने में असमर्थता जाहिर करते हुये बिलासपुर में चिकित्सकीय परीक्षण के लिये पीडिता को ‘रेफर’ कर दिया।
गवाही का खामियाजा
जांजगीर-चांपा जिले की पुलिस जब मंगलवार को बिलासपुर जिला अस्पताल पहुंची तो डॉक्टरों ने यह कहते हुए हाथ खडे कर दिए कि चिकित्सकीय जांच बिलासपुर जिला अस्पताल में करने का उल्लेख रिपोर्ट में नहीं है।
बिलासपुर में सरकारी जिला अस्पताल के अलावा छत्तीसगढ आयुर्विज्ञान संस्थान मेडिकल कॉलेज भी है। जांजगीर-चांपा पुलिस पीडिता को छत्तीसगढ आयुर्विज्ञान संस्थान ले कर पहुंची तो वहां भी चिकित्सकों ने जांच करने से मना कर दिया। अंततः जांजगीर-चांपा जिले की पुलिस महिला को बिना चिकित्सकीय जांच के वापस लौट गई।
पुलिस का दावा है कि कागजात को दुरुस्त कराने के बाद बुधवार को छत्तीसगढ आयुर्विज्ञान संस्थान में ही महिला का चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाएगा। लेकिन सामूहिक दुष्कर्म के बाद चिकित्सकीय जांच की इस कागजी कार्रवाई ने पीडिता और उसके परिवार की हिम्मत तोड दी है।
पीडिता के पति ने कहा- “एक तो हम पर पहले से ही परेशानियों का पहाड टूटा था, उस पर अब जांच के नाम पर यह फजीहत हम पर और भारी पड रही है। लगता है, मेरी पत्नी ने बडे लोगों के खिलाफ गवाही दे कर, सच का साथ दे कर बडी गलती की है।”