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रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में कमाल: 10 किलो से ज्यादा वजनी ट्यूमर निकालकर डॉक्टरों ने रचा इतिहास
Sun, 12 Apr 2026 01:47 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 12 Apr 2026 01:47 PM IST
सार
रायपुर के डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय ने एक बेहद जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है।
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10 किलो से ज्यादा वजनी ट्यूमर निकालकर डॉक्टरों ने रचा इतिहास
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रायपुर के डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय ने एक बेहद जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। यहां के सर्जरी विभाग ने एक मरीज के शरीर से 10.30 किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर निकालकर न सिर्फ उसकी जान बचाई, बल्कि उसे वर्षों के दर्द और सामाजिक असहजता से भी राहत दिलाई।
करीब 15 साल से मरीज इस गंभीर समस्या से जूझ रहा था। पीठ पर लगातार बढ़ रही इस गांठ ने उसकी सामान्य जिंदगी लगभग छीन ली थी। चलना-फिरना, बैठना, सोना—हर रोजमर्रा का काम मुश्किल हो गया था। इतना ही नहीं, इस स्थिति का असर मरीज के मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास पर भी साफ नजर आने लगा था।
मरीज जब अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टरों ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत विस्तृत जांच शुरू की। सर्जरी से पहले रेडियोलॉजी, ब्लड टेस्ट और अन्य जरूरी परीक्षणों के जरिए पूरी तैयारी की गई। यह ऑपरेशन सामान्य नहीं था, बल्कि इसमें हर कदम बेहद सावधानी और सटीक योजना की मांग कर रहा था।
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इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी का नेतृत्व सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. संतोष सोनकर और विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह ने किया। उनके मार्गदर्शन में विशेषज्ञों की टीम ने कई घंटों की मेहनत के बाद इस विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक शरीर से अलग किया। ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव को नियंत्रित करना, महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा और संक्रमण से बचाव जैसी कई जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
इस सर्जरी में एनेस्थीसिया टीम की भूमिका भी बेहद अहम रही। डॉ. जया लालवानी और डॉ. प्रतिभा जैन शाह ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखा, जिससे पूरी प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से पूरी हो सकी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में अब तक इतने बड़े ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालने के मामले बेहद कम सामने आए हैं। ऐसे में यह उपलब्धि न केवल अस्पताल बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात मानी जा रही है।
ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत लगातार बेहतर होती गई और कुछ दिनों की निगरानी के बाद उसे स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दे दी गई। अब मरीज सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है, जो इस सर्जरी की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
यह उपलब्धि सिर्फ एक ऑपरेशन की सफलता नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता, डॉक्टरों के समर्पण और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के प्रभावी उपयोग का प्रमाण भी है। इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि प्रदेश के सरकारी अस्पताल भी जटिल से जटिल इलाज करने में पूरी तरह सक्षम हैं और मरीजों को बेहतर जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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करीब 15 साल से मरीज इस गंभीर समस्या से जूझ रहा था। पीठ पर लगातार बढ़ रही इस गांठ ने उसकी सामान्य जिंदगी लगभग छीन ली थी। चलना-फिरना, बैठना, सोना—हर रोजमर्रा का काम मुश्किल हो गया था। इतना ही नहीं, इस स्थिति का असर मरीज के मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास पर भी साफ नजर आने लगा था।
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मरीज जब अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टरों ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत विस्तृत जांच शुरू की। सर्जरी से पहले रेडियोलॉजी, ब्लड टेस्ट और अन्य जरूरी परीक्षणों के जरिए पूरी तैयारी की गई। यह ऑपरेशन सामान्य नहीं था, बल्कि इसमें हर कदम बेहद सावधानी और सटीक योजना की मांग कर रहा था।
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इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी का नेतृत्व सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. संतोष सोनकर और विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह ने किया। उनके मार्गदर्शन में विशेषज्ञों की टीम ने कई घंटों की मेहनत के बाद इस विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक शरीर से अलग किया। ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव को नियंत्रित करना, महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा और संक्रमण से बचाव जैसी कई जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
इस सर्जरी में एनेस्थीसिया टीम की भूमिका भी बेहद अहम रही। डॉ. जया लालवानी और डॉ. प्रतिभा जैन शाह ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखा, जिससे पूरी प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से पूरी हो सकी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में अब तक इतने बड़े ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालने के मामले बेहद कम सामने आए हैं। ऐसे में यह उपलब्धि न केवल अस्पताल बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात मानी जा रही है।
ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत लगातार बेहतर होती गई और कुछ दिनों की निगरानी के बाद उसे स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दे दी गई। अब मरीज सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है, जो इस सर्जरी की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
यह उपलब्धि सिर्फ एक ऑपरेशन की सफलता नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता, डॉक्टरों के समर्पण और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के प्रभावी उपयोग का प्रमाण भी है। इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि प्रदेश के सरकारी अस्पताल भी जटिल से जटिल इलाज करने में पूरी तरह सक्षम हैं और मरीजों को बेहतर जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।