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Raipur News: अंबेडकर अस्पताल के डॉक्टर्स ने किया कमाल, 70 साल वर्षीय महिला मरीज की बचाई जिंदगी

Sat, 10 Feb 2024 05:15 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Sat, 10 Feb 2024 05:15 PM IST
सार

राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में कॉर्डियोलॉजी विभाग ने ट्रांसकैथेटर माइट्रल वाल्व इम्प्लांट (टीएमवीआर) वॉल्व इन वॉल्व प्रक्रिया के जरिए एक 70 वर्षीय महिला मरीज की जिंदगी बचाई।

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Raipur News: Doctors of Ambedkar Hospital did wonders, saved life 70 year old female patient
डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के डॉक्टर्स - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में कॉर्डियोलॉजी विभाग ने ट्रांसकैथेटर माइट्रल वाल्व इम्प्लांट (टीएमवीआर) वॉल्व इन वॉल्व प्रक्रिया के जरिए एक 70 वर्षीय महिला मरीज की जिंदगी बचाई। मरीज की छाती पर बिना किसी चीरे के माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट किया गया। डॉ. स्मित श्रीवास्तव के अनुसार, माइट्रल वाल्व को रोगी की जांघ की नसों के माध्यम से एंजियोप्लास्टी में हृदय की नसों में स्टेंट लगाने के समान प्रक्रिया की ओर से प्रत्यारोपित किया गया। मरीज को 26 एमएम का माइट्रल वॉल्व लगाया गया है।

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मरीज गंभीर माइट्रल रेगर्गिटेशन (एमआर) से पीड़ित था, जो एक सामान्य हृदय रोग है जिसके लिए आम तौर पर ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता होती है। मरीज को 6 फरवरी 2024 को कॉर्डियोलॉजी विभाग, एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में नॉन इनवेसिव प्रक्रिया से गुजरना पड़ा और सिर्फ दो दिनों के बाद सुरक्षित रूप से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
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मरीज को बेहोश कर दाहिने जांघ की नसों के रास्ते कैथेटर के माध्यम से एओर्टा तक पहुंचे। एओर्टा से बैलून को ले जाते हुए माइट्रल वाल्व के लिए जगह बनाई। उसके बाद बैलून एक्सपेंडेबल वाल्व को पुराने वाल्व की जगह पर प्रत्यारोपित किया गया। डॉ. स्मित श्रीवास्तव के अनुसार, टीएमवीआर (ट्रांसकैथेटर माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट) वाल्व-इन-वाल्व थेरेपी एक अत्याधुनिक प्रक्रिया है। यह उन रोगियों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो पहले माइट्रल वाल्व सर्जरी करा चुके हैं लेकिन अब वाल्व विफलता अनुभव कर रहे हैं। किसी अन्य ओपन-हार्ट सर्जरी के बजाय, यह तकनीक कैथेटर के माध्यम से प्रत्यारोपित वाल्व के भीतर वाल्व प्रत्यारोपण की अनुमति देती है। प्रक्रिया में एक कैथेटर को पैर की नस के माध्यम से डाला जाता है और हृदय तक पहुंचा जाता है जहां नया वाल्व खराब हो चुके सर्जिकल वाल्व के भीतर रखा जाता है।

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