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इस रेलगाड़ी की अनोखी है प्रथा, चुनावी मौसम में ही चलती है अकसर

Thu, 04 Oct 2018 04:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Updated Thu, 04 Oct 2018 04:48 PM IST
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Raipur-Korba InterCity Express, after four years, will run again in the election season
कोरबा इंटरसिटी
ये चुनावी ट्रेन है जो समय -समय पर चलाई और बंद कर दी जाती है। खबर है कि पिछले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले, 2014 में रायपुर से कोरबा के बीच शुरू की गई इंटरसिटी एक्सप्रेस जो महज तीन महीने चलाकर बंद कर दी गई थी वह चुनावी मौसम आते ही फिर शुरू होगी।
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पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान शुरू हुई यह ट्रेन सिर्फ तीन महीने चलकर बंद कर दी गई थी। ट्रेन के बंद किए जाने के बाद से ही इसके शुरू किए जाने की मांग उठाई जाती रही थी लेकिन इसे शुरू नहीं की गई। लेकिन पिछले दिनों अचानक ही रेलमंत्री ने इस ट्रेन को शुरू करने का ऐलान कर दिया है।
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उन्होंने यह ऐलान कोरबा में हुई एक जनसभा में किया। इस घोषणा के बाद  रेलवे ने ट्रेन दोबारा चालू करने के लिए किसी तरह से अलग-अलग डिब्बों का इंतजाम कर लिया है और सात अक्टूबर से इसे फिर चलाये जाने का फैसला लिया। 
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जुगाड़ की बोगियों के साथ चलाई जा रही इस ट्रेन को इस बार फिर से तीन-चार महीने में बंद न कर दिया जाए इस आशंका से प्रदेशवासी डरे हुए हैं। क्योंकि रेलवे के टाइम-टेबल में अभी यह इसे नियमित के बजाय विशेष ट्रेन के रूप में दर्ज की गई है। 

इंटरसिटी हसदेव एक्सप्रेस को चलाने के लिए जैसे ही रेलमंत्री ने घोषणा की, रेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। क्योंकि रैक की कमी से जूझ रही रेलवे के पास इस ट्रेन को चलाने के लिए रैक ही नहीं हैं। फिर तय हुआ कि इसे दो अलग-अलग ट्रेनों के रैक और बोगियों के साथ चलाया जाए। लेकिन ऐसे रैक भी सातों दिन उपलब्ध नहीं रहेंगे। तब तयहुआ कि दो तरह के रैक से यह ट्रेन शुरू कर दी जाए, बाकी इंतजाम बाद में कर दिए जाएंगे।

 रेलमंत्री पीयूष गोयल 6 तारीख को इस ट्रेन को कोरबा से हरी झंडी दिखाकर रायपुर रवाना करेंगे। रेलवे प्रशासन जोड़-तोड़ कर ट्रेन तो चलाने के लिए तैयार हो गया लेकिन अब मामला ट्रेन के किराए पर आकर फंस गया है।

क्योंकि रेलवे अभी तक यह तय नहीं कर पाया है कि इसका किराया क्या लिया जाए?  वजह ये है कि हफ्ते में तीन दिन यह जनशताब्दी के डिब्बों के साथ चलेगी, जिसका किराया ज्यादा है।

एलएचबी कोच का किराया सामान्य ट्रेनों जैसा है। इसलिए एक ही ट्रेन के दो किराए कैसे तय किए जा सकते हैं। भारी उहा -पोह से गुजर रही रेलवे का यह मामला बोर्ड तक चला गया है, लेकिन वहां से जवाब नहीं आया है। जबकि जोन ने प्रस्ताव दिया है कि कोई भी बोगी चले, किराया एक जैसा होना चाहिए। 

इंटरसिटी ट्रेन के चलाने की रेलवे बोर्ड की यह उहा-पोह तब और बढ़ गई जब यह बात सामने आई कि दो तरह के कोच के साथ नंबर भी अलग-अलग रहेंगे। लेकिन कोरबा रायपुर के लोग यह नहीं भूल पाए हैं कि कोरबा-रायपुर इंटरसिटी चार साल पहले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले, 27 फरवरी 2014 को शुरू हुई थी। इसके बाद चुनाव हुए और केंद्र की यूपीए सरकार बदल गई। नई सरकार आई और इस ट्रेन को बंद कर दिया गया था। अब एकबार फिर नवंबर में चुनाव हैं।   
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