फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Questions raised over releasing blind wild buffalo 'Chhotu' into the wild after 20 years in Chhattisgarh

Chhattisgarh News: संरक्षण या जोखिम? अंधे वन भैंसे 'छोटू' को 20 साल बाद जंगल में छोड़ने पर उठे सवाल

Sun, 05 Apr 2026 01:03 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Sun, 05 Apr 2026 01:03 PM IST
सार

विभाग असम से लाई गई तीन मादा वन भैंसों के साथ 'सॉफ्ट रिलीज' के तहत छोटू को प्राकृतिक आवास में छोड़ना चाहता है। योजना के मुताबिक, पहले सभी जानवरों को कुछ समय तक बाड़े में रखा जाएगा और फिर रेडियो कॉलर लगाकर उन्हें खुले जंगल में छोड़ दिया जाएगा।

विज्ञापन
Questions raised over releasing blind wild buffalo 'Chhotu' into the wild after 20 years in Chhattisgarh
वन भैंसे 'छोटू' को अब जंगल में छोड़ने की योजना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग एक ऐसे फैसले की तैयारी में है, जिसने वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों के बीच बहस छेड़ दी है। करीब 25 साल के, दृष्टिहीन और लंबे समय से कैद में रहे वन भैंसे 'छोटू' को अब जंगल में छोड़ने की योजना बनाई जा रही है।
विज्ञापन


दरअसल, विभाग असम से लाई गई तीन मादा वन भैंसों के साथ 'सॉफ्ट रिलीज' के तहत छोटू को प्राकृतिक आवास में छोड़ना चाहता है। योजना के मुताबिक, पहले सभी जानवरों को कुछ समय तक बाड़े में रखा जाएगा और फिर रेडियो कॉलर लगाकर उन्हें खुले जंगल में छोड़ दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य वन भैंसों की घटती संख्या को बढ़ाना बताया जा रहा है।
विज्ञापन


हालांकि इस योजना को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। छोटू पिछले दो दशकों से कैद में रहा है और पूरी तरह से अंधा बताया जा रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों को आशंका है कि वह जंगल के माहौल में खुद को ढाल नहीं पाएगा। भोजन की व्यवस्था, शिकारियों से बचाव और समूह से संपर्क ये सभी उसके लिए चुनौती बन सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


जानकार यह भी कहते हैं कि इतने लंबे समय तक कैद में रहने के बाद किसी जंगली जानवर का व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है। ऐसे में जंगल में उसकी जीवित रहने की संभावना कम हो सकती है। साथ ही, प्रजनन की क्षमता भी उसकी उम्र के कारण सीमित मानी जा रही है।

मामले को और जटिल बनाता है यह तथ्य कि जिन मादा भैंसों को साथ छोड़ा जाएगा, उनका समूह बहुत छोटा होगा। बाघों की मौजूदगी वाले इलाके में छोटा झुंड ज्यादा असुरक्षित माना जाता है। इससे न सिर्फ छोटू बल्कि मादा भैंसों और उनके शावकों पर भी खतरा मंडरा सकता है।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस योजना की टाइमिंग और रणनीति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि प्रजनन ही लक्ष्य था, तो यह कदम पहले क्यों नहीं उठाया गया। साथ ही, पिछले वर्षों में किए गए अन्य प्रयोगों और खर्चों को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।


वहीं, वन विभाग का पक्ष है कि यह पहल राज्य के राजकीय पशु वन भैंसे के संरक्षण के लिए जरूरी है। विभाग का दावा है कि बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय सहयोग के चलते अब ऐसे प्रयासों के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed