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CG News: जेल में बंदियों को मिला स्वरोजगार का प्रशिक्षण, रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनाने की पहल
Tue, 14 Jul 2026 03:30 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 14 Jul 2026 03:30 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ में बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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जेल में बंदियों को मिला स्वरोजगार का प्रशिक्षण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में सूरजपुर जिला जेल में सेंट्रल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के सहयोग से 13 दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 35 बंदियों ने हिस्सा लिया।
2 से 13 जुलाई तक चले इस प्रशिक्षण में बंदियों को अगरबत्ती, साबुन और हैंडवॉश बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, विपणन, वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग प्रक्रियाओं और विभिन्न सरकारी स्वरोजगार योजनाओं की भी जानकारी दी गई, ताकि रिहाई के बाद वे स्वयं का रोजगार शुरू कर सकें। प्रशिक्षण के समापन पर सभी प्रतिभागियों का लिखित और प्रायोगिक मूल्यांकन किया गया तथा सफल बंदियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
जेल प्रशासन के अनुसार, ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें सकारात्मक सोच और आत्मनिर्भर जीवन की ओर प्रेरित करते हैं। वहीं आरसेटी ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद भी संस्थान बैंक ऋण, स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ने और दो वर्षों तक मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा।
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संस्थान के अनुसार, अगरबत्ती और साबुन निर्माण जैसे लघु उद्योगों के माध्यम से प्रशिक्षित व्यक्ति प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर सकते हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए बंदियों को नया अवसर देकर उन्हें सम्मानजनक जीवन और स्वरोजगार की राह से जोड़ना है।
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2 से 13 जुलाई तक चले इस प्रशिक्षण में बंदियों को अगरबत्ती, साबुन और हैंडवॉश बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, विपणन, वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग प्रक्रियाओं और विभिन्न सरकारी स्वरोजगार योजनाओं की भी जानकारी दी गई, ताकि रिहाई के बाद वे स्वयं का रोजगार शुरू कर सकें। प्रशिक्षण के समापन पर सभी प्रतिभागियों का लिखित और प्रायोगिक मूल्यांकन किया गया तथा सफल बंदियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
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जेल प्रशासन के अनुसार, ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें सकारात्मक सोच और आत्मनिर्भर जीवन की ओर प्रेरित करते हैं। वहीं आरसेटी ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद भी संस्थान बैंक ऋण, स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ने और दो वर्षों तक मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा।
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संस्थान के अनुसार, अगरबत्ती और साबुन निर्माण जैसे लघु उद्योगों के माध्यम से प्रशिक्षित व्यक्ति प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर सकते हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए बंदियों को नया अवसर देकर उन्हें सम्मानजनक जीवन और स्वरोजगार की राह से जोड़ना है।