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CG: प्रमुख सचिव बोरा बोले- पीएम जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान ने आदिम वर्ग के विकास मिली ऊंचाई

Sun, 11 May 2025 08:44 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Sun, 11 May 2025 08:44 PM IST
सार

भारतीय लोक प्रशासनिक संस्थान छत्तीसगढ़, क्षेत्रीय शाखा रायपुर के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ में आदिम जाति विकास में चुनौतियां विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई।

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PM Janman and Dharti Aaba Tribal Village Development Campaign has given boost to development primitive class
छत्तीसगढ़ में आदिम जाति के विकास में चुनौतियां विषय पर हुई परिचर्चा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय लोक प्रशासनिक संस्थान छत्तीसगढ़, क्षेत्रीय शाखा रायपुर के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ में आदिम जाति विकास में चुनौतियां विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित करते हुए आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि पीएम जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान ने आदिम जाति वर्ग विशेषकर पिछड़ी जनजातियों (पीजीटीव्ही) के विकास को ऊंचाई प्रदान करते हुए एक नई दशा-दिशा प्रदान की है। प्रमुख सचिव बोरा ने केन्द्र और राज्य सरकार के सहयोग से आदिम जाति कल्याण के लिए चलाए जा रहे विभिन्न योजनाओं की सफलता और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इन वर्गों के विकास में बाधा बनने वाले प्रमुख चुनौतियों की भी जानकारी दी। 
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प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रमुख रूप से 43 जनजातियां हैं, इनमें अलग-अलग उपजातिया भी शामिल है तथा राज्य में अबूझमाड़, बैगा, कमार, बिरहोर, पहाड़ी कोरवा विशेष पिछड़ी जनजाति के रूप में चिन्हांकित है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दृष्टिकोण से जंगल का नाम आते ही हमारे मन में बस्तर और सरगुजा की छाप दिखाई देने लगती है। मैदानी क्षेत्रों के अलावा यदि हम दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में निवासरत जनजाति वर्ग के विकास की बात करें तो चुनौती और अवसर प्रमुख बिन्दु हैं। अलग-अलग क्षेत्र में निवास करने वाले आदिम जाति वर्ग के परिवारों की अलग-अलग चुनौतियां है, कहीं शिक्षा तो कहीं जागरूकता की चुनौतियां है। वहीं बहुत से स्थानों पर अवसर नहीं मिलने के कारण विकास के राष्ट्रीय इंडेक्स में पिछड़ जाते हैं। 
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प्रमुख सचिव बोरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 146 विकासखण्ड में से 85 विकासखण्ड अनुसूचित क्षेत्र है। इस अभियान के क्रियान्वयन के लिए राज्य के 32 जिलों के 138 विकासखण्डो के 6691 आदिवासी बहुल गांव का चयन किया गया है। चयनित गांव में बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक, उन्नति के कार्य किए जा रहे हैं।
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धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में 25 कार्यक्रम शामिल हैं। यह योजना केन्द्र और राज्य सरकार के सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है। प्रधानमंत्री जनजातीय उत्कर्ष ग्राम अभियान का उद्देश्य भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका के क्षेत्र से जनजातीय परिवारों को जोड़कर उनके समग्र और सतत विकास को सुनिश्चित किया जा रहा है।

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत राज्य के विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों और उनके गांवों में शत-प्रतिशत विकास के लिए कार्य कर रही है। योजना के तहत चिन्हांकित गांवों में भी बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य सहित मूलभूत सुविधाओं के साथ ही वहां के निवासियों के लिए आधारकार्ड, आयुष्मानकार्ड, राशनकार्ड सहित सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि पहले दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के जमीनों का रिकार्ड उपलब्ध नहीं हो पाता था, अब सेटेलाईट एवं नये तकनीक के माध्यम से जियो टेगिंग तथा जियो फैंसिंग का कार्य किया जा रहा है। इससे कोई भी व्यक्ति भुईंया पोर्टल पर अपने नाम और खसरा नंबर अपलोड कर ऑनलाईन राजस्व रिकार्ड का अवलोकन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पहले दूरस्थ अंचलों में राजस्व त्रुटि सुधार नहीं हो पाता था, उनमें सुधार किया जा रहा है। मालिकाना हक वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर डाटा अपडेट उनके परिजनों को लाभ दिलाया जा रहा है।


परिचर्चा को भारतीय लोक प्रशासनिक संस्थान छत्तीसगढ़ के चेयनमेन एवं पूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य मिश्रा, डिप्टी चेयरमेन डॉ. इंदिरा मिश्रा ने भी सम्बोधित किया। इस मौके पर संस्थान के सदस्यों ने भी अपने-अपने सुझाव प्रकट किए। परिचर्चा में दिनेश श्रीवास्तव, डॉ. ओमकार लाल श्रीवास्तव, संजय अलंग, अनूप श्रीवास्तव सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।
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