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CG: क्षमता दो लाख मैट्रिक टन, गन्ना मिल पाता केवल 70 हजार मीट्रिक टन; संघर्षों में संचालित हो रहा चीनी मिल
Thu, 26 Dec 2024 06:11 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
Published by: श्याम जी.
Updated Thu, 26 Dec 2024 06:11 PM IST
सार
मां दंतेश्वरी सहकारी शक्कर कारखाने के मैनेजिंग डायरेक्टर बसंत कुमार ने बताया कि छह दिसंबर से यहां पेराई की शुरुआत की गई थी। अब तक यहां पर 15 हजार 598 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हो गई है और 13 हजार 145 क्विंटल शक्कर का उत्पादन किया जा चुका है।
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मां दंतेश्वरी सहकारी शक्कर कारखाना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बालोद जिले में एकमात्र उद्योग के रूप में स्थापित मां दंतेश्वरी सहकारी शक्कर कारखाना काफी तकलीफों के बीच संचालित हो रहा है। छह दिसंबर को कारखाने में पेराई शुरू की गई थी। इस कारखाने की क्षमता दो लाख मैट्रिक टन पेराई की है, लेकिन यहां पर गन्ने की कमी की वजह से 70 हजार मीट्रिक टन की पेराई मात्र हो पाती है। वहीं, किसानों ने बताया कि उन्हें गन्ना बेचने के लिए लेट लतीफी का सामना करना पड़ता है।
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मां दंतेश्वरी सहकारी शक्कर कारखाने के मैनेजिंग डायरेक्टर बसंत कुमार ने बताया कि छह दिसंबर से यहां पेराई की शुरुआत की गई थी। अब तक यहां पर 15 हजार 598 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हो गई है और 13 हजार 145 क्विंटल शक्कर का उत्पादन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि शक्कर का जो प्रतिशत है, वह 9.46 है। पिछले वर्ष 11% तक की रिकवरी हुई थी। वहां तक पहुंचाने की कोशिश प्रबंधन द्वारा की जा रही है। किसानों को एक करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। एक करोड़ रुपये का भुगतान जल्द होने की बात कही गई है।
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किसानों की सुविधा के लिए उठाए कदम
प्रबंध संचालक बसंत कुमार ने बताया कि यहां पर किसने की सुविधा के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जैसे उन्हें एडवांस में टोकन दिया जा रहा है। वहीं, दूर-दराज के किसानों के लिए 30 रुपये में दाल भात केंद्र की शुरुआत की गई है, लेकिन जहां विश्राम करने की बात आई तो कुछ किसानों ने बताया कि वहां पर गंदगी रहती है, जिसके कारण उन्हें ट्रैक्टर की ट्रॉली के नीचे ही रात गुजारनी पड़ती है।
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हो रही असुविधा
किसान पांचुराम ने बताया कि टोकन तो मिल रहा है, लेकिन खाली होने में काफी समय लग रहा है। इसके कारण गन्ने का वजन भी काम हो जाता है और उन्हें तकलीफों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि वह तीन दिन से यहां पर ट्रैक्टर का लाइन लगाकर अपने बारी आने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, प्रबंधन के सूत्रों ने बताया कि बीती रात कुछ समस्या होने के कारण कारखाने में ब्रेकडाउन की स्थिति निर्मित हुई थी, जिसे प्रबंध संचालक बसंत कुमार ने सामान्य विषय बताया। उन्होंने कहा कि हम गाने के रकबे को बढ़ाने के लिए भी यहां पर कार्य कर रहे हैं।
क्षमता से कम होती है पेराई
औद्योगिक क्षेत्र की बात करें तो बालोद जिले में उद्योग के नाम में सिर्फ एक माध्यम से सभी सहकारी शक्कर कारखाना निर्मित है, उसकी क्षमता के अनुरूप भी गन्ने का उत्पादन बालोद जिले के किस नहीं कर पा रहे हैं। हर बार गाने का रकबा बढ़ाने का दवा तो किया जाता है, लेकिन यहां पर गन्ने का रकबा पिछले कुछ वर्षों में और घटा है, जिसका प्रमुख कारण यह है कि धान की कीमतों में सरकार ने जाप किया है तो किसान धान की ओर आकर्षित हो रहे हैं। वहीं, बालोद जिला ड्रिसन में शामिल है इसके लिए दलहन तिलहन और गाने के उत्पादन के लिए भी जागरूक किया जा रहा है, लेकिन किसान इस बार ग्रीष्मकालीन फसलों में भी धन को प्राथमिकता दे रहे हैं।