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सीजी: मोहला-मानपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, जाति प्रमाण पत्र पर भी सवाल
Fri, 02 Oct 2026 05:20 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 02 Oct 2026 05:20 PM IST
सार
जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह के खिलाफ सात सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग की है। सदस्यों ने कलेक्टर को पत्र सौंपकर विशेष बैठक और गुप्त मतदान की मांग की है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के मोहला-मानपुर जिला पंचायत के कई निर्वाचित प्रतिनिधियों ने जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का पत्र सौंपा है। पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले में सदस्यों ने कलेक्टर एवं विहित प्राधिकारी कार्यालय पहुंचकर लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। इस आवेदन के माध्यम से सदस्यों ने अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए उन्हें पद से हटाने के लिए विशेष बैठक आयोजित करने का आग्रह किया है।
अविश्वास प्रस्ताव का मांग पत्र
जिला पंचायत सदस्यों ने मांग पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि वर्तमान अध्यक्ष नम्रता सिंह ने सदन का विश्वास पूरी तरह खो दिया है। प्रतिनिधियों का आरोप है कि जिला पंचायत में कामकाज का तरीका बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है। अध्यक्ष पर मनमाने और एकतरफा ढंग से काम करने का आरोप लगाते हुए सदस्यों ने कहा कि कई महत्वपूर्ण योजनागत निर्णय जनप्रतिनिधियों को बिना जानकारी दिए ही ले लिए जाते हैं। विकास कार्यों के लिए राशि के आवंटन, प्रशासनिक फैसलों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी निर्वाचित सदस्यों की उपेक्षा की जा रही है। सदस्यों का कहना है कि सदन की सहमति और खुली चर्चा के बिना फैसले लिए जाने से क्षेत्र का विकास प्रभावित हो रहा है।
लामबंद हुए पंचायत सदस्य
अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया में कई प्रमुख सदस्य एकजुट हो चुके हैं। सूचना पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक एक की सदस्य शांति बाई, क्षेत्र क्रमांक दो की सदस्य शेश्वरी उइके, क्षेत्र क्रमांक चार की सदस्य सविता तिलक सोरी, क्षेत्र क्रमांक पांच के सदस्य नरसिंह भंडारी और क्षेत्र क्रमांक 10 की सदस्य रेखा कोठारी प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अतिरिक्त जिला पंचायत के अन्य सदस्यों भोजेश शाह मंडावी और लखन लाल कलामे ने भी पत्र पर अपने हस्ताक्षर कर अध्यक्ष के प्रति अविश्वास जताया है। इन सभी सदस्यों ने कलेक्टर से मांग की है कि सदन के वास्तविक मत को सामने लाने के लिए गुप्त मतदान की व्यवस्था की जाए।
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जाति प्रमाण पत्र का विवाद
जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह केवल अविश्वास प्रस्ताव के कारण ही नहीं, बल्कि अपने जाति प्रमाण पत्र से जुड़े जटिल कानूनी प्रकरण के कारण भी लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। उनके गोंड अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता को लेकर कानूनी सवाल उठाए गए हैं और यह मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अध्यक्ष के विरुद्ध आरोप हैं कि उन्होंने कूटचरित जाति प्रमाण पत्र, पड़ोसी राज्य ओडिशा मूल से संबंधित दस्तावेज और एक निरस्त हो चुके परिपत्र के आधार पर राहत प्राप्त की थी। इस पूरे प्रकरण में वैधानिक और न्यायिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट होनी बाकी है, लेकिन इस बीच सदस्यों की लामबंदी से उनकी राजनीतिक मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
कलेक्टर के निर्णय पर टिकी नजरें
इस संपूर्ण घटनाक्रम के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासनिक स्तर पर कलेक्टर द्वारा लिए जाने वाले फैसले पर टिक गई हैं। नियमानुसार आवेदन पर विचार करने के उपरांत कलेक्टर यह तय करेंगे कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए जिला पंचायत की विशेष बैठक कब बुलाई जाएगी। यदि विहित प्राधिकारी द्वारा विशेष बैठक आहूत करने की प्रक्रिया को हरी झंडी मिलती है, तो सदन के भीतर गुप्त मतदान कराया जाएगा। ऐसी स्थिति में अध्यक्ष के पक्ष और विपक्ष में सदस्यों का संख्या बल अत्यंत निर्णायक सिद्ध होगा।
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अविश्वास प्रस्ताव का मांग पत्र
जिला पंचायत सदस्यों ने मांग पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि वर्तमान अध्यक्ष नम्रता सिंह ने सदन का विश्वास पूरी तरह खो दिया है। प्रतिनिधियों का आरोप है कि जिला पंचायत में कामकाज का तरीका बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है। अध्यक्ष पर मनमाने और एकतरफा ढंग से काम करने का आरोप लगाते हुए सदस्यों ने कहा कि कई महत्वपूर्ण योजनागत निर्णय जनप्रतिनिधियों को बिना जानकारी दिए ही ले लिए जाते हैं। विकास कार्यों के लिए राशि के आवंटन, प्रशासनिक फैसलों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी निर्वाचित सदस्यों की उपेक्षा की जा रही है। सदस्यों का कहना है कि सदन की सहमति और खुली चर्चा के बिना फैसले लिए जाने से क्षेत्र का विकास प्रभावित हो रहा है।
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लामबंद हुए पंचायत सदस्य
अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया में कई प्रमुख सदस्य एकजुट हो चुके हैं। सूचना पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक एक की सदस्य शांति बाई, क्षेत्र क्रमांक दो की सदस्य शेश्वरी उइके, क्षेत्र क्रमांक चार की सदस्य सविता तिलक सोरी, क्षेत्र क्रमांक पांच के सदस्य नरसिंह भंडारी और क्षेत्र क्रमांक 10 की सदस्य रेखा कोठारी प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अतिरिक्त जिला पंचायत के अन्य सदस्यों भोजेश शाह मंडावी और लखन लाल कलामे ने भी पत्र पर अपने हस्ताक्षर कर अध्यक्ष के प्रति अविश्वास जताया है। इन सभी सदस्यों ने कलेक्टर से मांग की है कि सदन के वास्तविक मत को सामने लाने के लिए गुप्त मतदान की व्यवस्था की जाए।
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जाति प्रमाण पत्र का विवाद
जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह केवल अविश्वास प्रस्ताव के कारण ही नहीं, बल्कि अपने जाति प्रमाण पत्र से जुड़े जटिल कानूनी प्रकरण के कारण भी लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। उनके गोंड अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता को लेकर कानूनी सवाल उठाए गए हैं और यह मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अध्यक्ष के विरुद्ध आरोप हैं कि उन्होंने कूटचरित जाति प्रमाण पत्र, पड़ोसी राज्य ओडिशा मूल से संबंधित दस्तावेज और एक निरस्त हो चुके परिपत्र के आधार पर राहत प्राप्त की थी। इस पूरे प्रकरण में वैधानिक और न्यायिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट होनी बाकी है, लेकिन इस बीच सदस्यों की लामबंदी से उनकी राजनीतिक मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
कलेक्टर के निर्णय पर टिकी नजरें
इस संपूर्ण घटनाक्रम के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासनिक स्तर पर कलेक्टर द्वारा लिए जाने वाले फैसले पर टिक गई हैं। नियमानुसार आवेदन पर विचार करने के उपरांत कलेक्टर यह तय करेंगे कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए जिला पंचायत की विशेष बैठक कब बुलाई जाएगी। यदि विहित प्राधिकारी द्वारा विशेष बैठक आहूत करने की प्रक्रिया को हरी झंडी मिलती है, तो सदन के भीतर गुप्त मतदान कराया जाएगा। ऐसी स्थिति में अध्यक्ष के पक्ष और विपक्ष में सदस्यों का संख्या बल अत्यंत निर्णायक सिद्ध होगा।