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छत्तीसगढ़: आईपीएस रतन लाल डांगी मामले में नया मोड़, जांच अधिकारी बदलने का प्रस्ताव गृह सचिव को भेजा

Fri, 02 Oct 2026 01:10 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Fri, 02 Oct 2026 01:10 PM IST
सार

निलंबित आईपीएस रतन लाल डांगी से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले में पुलिस विभाग ने जांच अधिकारी बदलने का प्रस्ताव गृह सचिव को भेजा है। आईपीएस दीपांशु काबरा को नया जांच अधिकारी और प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाने की सिफारिश की गई है।

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New twist in IPS Ratan Lal Dangi case, proposal to change investigating officer sent to Home Secretary
निलंबित आईपीएस रतन लाल डांगी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्य के निलंबित भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी रतन लाल डांगी से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में पुलिस विभाग ने जांच अधिकारी बदलने का नया प्रस्ताव गृह सचिव को भेजा है। उच्च न्यायालय में दायर याचिका के बाद पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की ओर से यह कदम उठाया गया है। नए प्रस्ताव के तहत आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा को मामले का नया जांच अधिकारी बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही आईपीएस प्रशांत कुमार अग्रवाल को इस पूरे प्रकरण में प्रस्तुतकर्ता अधिकारी का दायित्व सौंपने की सिफारिश की गई है। सक्षम स्तर से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद नई जांच प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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अदालत की निगरानी में अब इस मामले की आगे की प्रक्रिया संचालित होगी। मामले में आरोप लगाने वाली पीड़ित महिला के अधिवक्ता अभिषेक पांडेय के अनुसार, उच्च न्यायालय में इस प्रकरण की अगली सुनवाई आगामी सप्ताह तय की गई है।
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निष्पक्ष जांच के लिए नया प्रस्ताव
पुलिस विभाग द्वारा उच्च न्यायालय में दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस महानिदेशक ने गृह सचिव को पत्र भेजकर पुराने जांच अधिकारियों के स्थान पर नए अधिकारियों की नियुक्ति का अनुरोध किया है। इस प्रकरण में पूर्व में सौंपी गई जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। पीड़ित महिला ने आरोप लगाया था कि शुरुआती जांच के दौरान उनके पक्ष को उचित तरीके से नहीं सुना गया।
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याचिका में दावा किया गया था कि पुरानी जांच प्रक्रिया में आरोपी अधिकारी को बचाने के प्रयास किए जा रहे थे। इसी वजह से पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और पूरी जांच को किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से कराने का अनुरोध किया। अदालत द्वारा जांच की वर्तमान स्थिति और अब तक हुई कार्रवाई का ब्योरा मांगने पर विभाग ने जांच अधिकारी बदलने के इस कदम की जानकारी न्यायालय को दी।

पहले की जांच प्रक्रिया पर सवाल
इस मामले की शुरुआती जांच का जिम्मा तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) आनंद छाबड़ा और तत्कालीन पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) मिलना कुर्रे को सौंपा गया था। हालांकि, पीड़ित महिला ने इन दोनों अधिकारियों की जांच पर अविश्वास व्यक्त किया था। याचिका में स्पष्ट किया गया कि जांच करने वाले अधिकारियों में से एक अधिकारी आरोपी के समान पद पर कार्यरत थे, जबकि दूसरी अधिकारी उनसे कनिष्ठ पद पर थीं।

इसी प्रशासनिक स्थिति को देखते हुए पीड़िता ने आशंका जताई थी कि जांच प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मांग की थी कि निष्पक्ष न्याय के लिए दोनों जांच अधिकारियों को हटाया जाए और मामले की जांच किसी महिला आईएएस अधिकारी को सौंपी जाए। उच्च न्यायालय ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के गृह सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। अब नए प्रस्ताव के बाद विभाग द्वारा आगामी सुनवाई में प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

सात साल के उत्पीड़न का आरोप
यह मामला पुलिस विभाग में पदस्थ एक उपनिरीक्षक (एसआई) की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा हुआ है। पीड़िता ने 15 अक्तूबर 2025 को पुलिस मुख्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए निलंबित आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता का कहना था कि उक्त अधिकारी पिछले सात वर्षों से उनका शारीरिक और मानसिक रूप से उत्पीड़न कर रहे हैं।


शिकायत सामने आने के बाद राज्य के गृह विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता ने आदेश जारी कर आईपीएस डांगी को उनके पद से हटा दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया था। हालांकि, आरोपी अधिकारी रतन लाल डांगी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा और निराधार करार दिया था। फिलहाल यह पूरा मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है और न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है।
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