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किसान की तालिबानी सजा: जशपुर में शर्मनाक घटना, नाबालिग को पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा
Thu, 12 Jun 2025 10:45 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जशपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जशपुर
Published by: अनुज कुमार
Updated Thu, 12 Jun 2025 10:45 PM IST
सार
जशपुर के पत्थलगांव थाना क्षेत्र के लाखझर गांव में बाल श्रम निषेध दिवस के दिन एक नाबालिग बच्चे को बिना ठोस सबूत के पेड़ से बांधकर डंडों से बुरी तरह पीटा गया। आरोपी किसान करमु राम ने बच्चे पर खेत में नुकसान और पुआल जलाने का आरोप लगाया।
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नाबालिग को पेड़ से बांधकर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आज जब पूरे देश में बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जा रहा है, तब छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के पत्थलगांव थाना इलाके में लाखझर गांव से एक घिनौनी घटना सामने आई है। जो बाल अधिकारों के हनन का उदाहरण है। लाखझर गांव में एक नाबालिग बालक को बगैर किसी ठोस प्रमाण के पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा गया। आरोपी ने बच्चे पर खेत में नुकसान पहुंचाने और पुआल जलाने का आरोप लगाया था।
गांव के किसान करमु राम ने बच्चे को बिना किसी साक्ष्य के दोषी ठहराते हुए उसे दिनदहाड़े पेड़ से बांधकर डंडों से मारा। बच्चे को बुरी तरह से घायल कर दिया गया और वह कई घंटों तक उसी हालत में बंधा रहा। इतना ही नहीं उसने इसकी तस्वीर भी पंचायत विकास समिति नामक व्हाट्सग्रुप में शेयर कर दी। परिवार के सदस्यों को जब इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर बच्चे को छुड़ाया और आरोपी से नुकसान की भरपाई का वादा किया। घायल बच्चे को तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।
बाल संरक्षण की जागरूकता की कमी
यह घटना इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बाल अधिकारों और कानूनी संरक्षण की समझ बहुत सीमित है। ऐसे मामलों में बच्चों को अक्सर चुप करा दिया जाता है, और आरोपी बिना किसी डर के खुलेआम घूमते रहते हैं।
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बाल संरक्षण अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता इस घटना को मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन मानते हैं। उन्होंने इस घटना को लेकर गहरी चिंता जताई है और बाल अधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए अधिक सख्त कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
समाज को आत्मचिंतन की जरूरत
बाल श्रम निषेध दिवस पर इस तरह की घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम बच्चों को वह सुरक्षा प्रदान कर पा रहे हैं, जिनके वे हकदार हैं। क्या समाज अब भी बच्चों के साथ हो रहे अन्याय को रोकने के लिए तैयार है? क्या हमें समाज के हर हिस्से में बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए अधिक जागरूकता फैलाने की जरूरत नहीं है?
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गांव के किसान करमु राम ने बच्चे को बिना किसी साक्ष्य के दोषी ठहराते हुए उसे दिनदहाड़े पेड़ से बांधकर डंडों से मारा। बच्चे को बुरी तरह से घायल कर दिया गया और वह कई घंटों तक उसी हालत में बंधा रहा। इतना ही नहीं उसने इसकी तस्वीर भी पंचायत विकास समिति नामक व्हाट्सग्रुप में शेयर कर दी। परिवार के सदस्यों को जब इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर बच्चे को छुड़ाया और आरोपी से नुकसान की भरपाई का वादा किया। घायल बच्चे को तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।
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बाल संरक्षण की जागरूकता की कमी
यह घटना इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बाल अधिकारों और कानूनी संरक्षण की समझ बहुत सीमित है। ऐसे मामलों में बच्चों को अक्सर चुप करा दिया जाता है, और आरोपी बिना किसी डर के खुलेआम घूमते रहते हैं।
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बाल संरक्षण अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता इस घटना को मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन मानते हैं। उन्होंने इस घटना को लेकर गहरी चिंता जताई है और बाल अधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए अधिक सख्त कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
समाज को आत्मचिंतन की जरूरत
बाल श्रम निषेध दिवस पर इस तरह की घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम बच्चों को वह सुरक्षा प्रदान कर पा रहे हैं, जिनके वे हकदार हैं। क्या समाज अब भी बच्चों के साथ हो रहे अन्याय को रोकने के लिए तैयार है? क्या हमें समाज के हर हिस्से में बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए अधिक जागरूकता फैलाने की जरूरत नहीं है?