छत्तीसगढ़ के 'मांझियों' ने भी पहाड़ का सीना चीरकर बनाया रास्ता
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माउंटेनमैन के नाम से प्रसिद्ध बिहार के दशरथ मांझी के बारे में तो आपने सुना ही होगा जिन्होंने सालों की मशक्कत के बाद पहाड़ का सीना चीरकर अपने गांव वालों के लिए रास्ता बना दिया था। कुछ ऐसा ही कारनामा किया है छत्तीसगढ़ के धमतारी जिले के लोगों ने, जिन्होंने छह महीने की मशक्कत के बाद एक पहाड़ को काटकर देहात से शहर की दूरी को 20 किलोमीटर से घटाकर मात्र पांच किलोमीटर कर दिया।
हालांकि मांझी की अपेक्षा गांव वालों ने यह काम सरकारी इमदाद मिलने के बाद किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार क्षेत्र के 200 से ज्यादा ग्रामीणों ने मनरेगा के तहत एक पहाड़ को काटकर शहर जाने वाले रास्ते का निर्माण किया।
हालांकि इस काम में बेशक 200 से ज्यादा लोगों ने छह महीने की मेहनत से यह उपलब्धि हासिल की लेकिन इस काम को प्रेरणा देने के पीछे मांझी जैसा ही एक माउंटेन मैन था। शारीरिक रूप से विकलांग बरातुराम ने इस काम को चुनौती के तौर पर लिया।
उन्होंने अपने एक हाथ की बदौलत ही इस काम को शुरू किया और देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीणों का कारवां उनके पीछे जुड़ता चला गया। शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्षम न होने के बावजूद भी बरातुराम हजारों लोगों की प्रेरणा बन गए।
इस योजना को मनरेगा के तहत देश का पहला बड़ा मिशन माना जा रहा है जिससे इतने लोगों के जीवन पर असर पड़ेगा। धमतरी जिले का प्रशासन भी इस उपलब्धि के लिए पूरी तरह ग्रामीणों को श्रेय दे रहा है।
दशरथ मांझी की तरह एक विकलांग व्यक्ति बना ग्रामीणों की प्रेरणा
धमतरी के कलेक्टर भीम सिंह बताते हैं कि, एक बार हम ग्रामीणों से उनकी समस्याओं और जरूरतों के बारे में बात कर रहे थे, तब उन्होंने हमें बताया कि यह पहाड़ उनके लिए एक अभिशाप है। वे जल्द से जल्द इसे काटना चाहते हैं, यह सुनकर हम अचंभित रह गए।
ग्रामीणों ने इसके लिए जो खाका तैयार किया वो और चौंकाने वाला था लेकिन उनकी हिम्मत देखकर हमने उन्हें इस काम के लिए मनरेगा के तहत भुगतान करने का निर्णय लिया।
एक बार प्रशासन के आगे आने के बाद लोगों का हौसला और बुलंद हो गया। उन्होंने बिना पीछे देखा इस काम को बीते अक्टूबर में शुरू कर दिया। इस काम में चार गांवों सैफनपारा, मदूमसिली, नयुकौना और भोटापारा के 200 से ज्यादा ग्रामीणों ने हाथ बंटाना शुरू किया। लोगों ने पहाड़ में रास्ता बनाने के लिए रात दिन काम किया।
मनरेगा के एक अधिकारी बताते हैं उन लोगों का उत्साह कमाल का था। उन्होंने देखते देखते पहाड़ काटकर 700 मीटर लंबी और 15 मीटर चौड़ी रोड का निर्माण कर दिया। पूरे प्रोजक्ट का लगभग 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
मनरेगा के तहत प्रशासन ने ग्रामीणों को किया भुगतान
हालांकि अब पड़ने वाली भीषण गर्मी एक बाधा है लेकिन हम जून तक इस काम को पूरा कर लेंगे। इस पूरे प्रोजक्ट के लिए 9.90 लाख रुपये का फंड स्वीकृत हुआ है। जितने भी लोग इस काम में लगे हैं उन्हें मनरेगा के तहत रोजाना 167 रुपये का भुगतान किया जा रहा है।
पहाड़ में रास्ता बनने से सभी ग्रामीण बहुत खुश हैं। मनरेगा अधिकारी धर्म सिंह कहते हैं यह रास्ता बनने से क्षेत्र में पर्यटन पर भी अच्छा असर पड़ेगा क्योंकि पर्यटकों को मरदुम बांध जाने के लिए अब लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।
गांव वाले बताते हैं कि पूर्व में छात्रों को इससे काफी दिक्कत उठानी पड़ती थी। उन्हें नथुकौना से नरहर गांव के सीनियर हाईस्कूल जाने के लिए 25 किमी की दूरी तय करनी पड़ती थी। अब यह दूरी घटकर मात्र 14 किमी रह गई है।
जबकि मदुमसिली गांव के लोगों को खेतों तक पहुंचने के लिए जो 20 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी उसमें भी राहत मिलेगी। वहीं जिले के कलेक्टर बताते हैं कि जब काम शुरू हुआ तो हमने बरतुराम को दूसरे की अपेक्षा कुछ हल्का काम करने का प्रस्ताव दिया जैसे इस काम में लगे लोगों को पानी पिलाने का लेकिन उसने इसे अस्वीकार कर दिया और दूसरों की तरह इस काम में हाथ बंटाने की बात कही।