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नक्सली हमला: हर तरफ मौत कर रही थी तांडव
रायपुर
Updated Sun, 26 May 2013 10:25 AM IST
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छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिले की दरभा घाटी में शनिवार को हुए देश के सबसे बड़े नक्सली हमले में कांग्रेस के काफिले पर जमकर कहर बरपा। हमले से दरभा घाटी की धरती खून से लाल हो गई।
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नक्सलियों ने काफिले को रोकने के लिए धमाका तो किया ही साथ ही दो घंटे तक अंधाधुंध गोलीबारी कर लोगों को भून डाला। हमले के बाद चारों तरफ मृतकों के शव बिखरे पडे़ थे। घायलों और मृतकों में महिलाएं भी थीं।
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हमले से हर तरफ लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। भयानक चीख-पुकार से समूची दरभा घाटी गूंज उठी। ऐसा लग रहा था कि घाटी में मौत तांडव कर रही हो। हर तरफ घायल पडे़ हुए कराह रहे थे, जबकि मृतकों के शव क्षत-विक्षत अवस्था में यहां-वहां बिखरे पडे़ थे।
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इनकी मदद करने वाला वहां कोई नहीं था। हालत यह थी कि इन लोगों को वहां से सुरक्षित स्थान या अस्पताल तक ले जाने वाला कोई नहीं था। जो जिंदा बचे थे, वो लोगों से अपनी जिंदगी की भीख मांग रहे थे।
एक बेबसी और लाचारी का आलम बन गया था। घायल लगातार अपने को बचाने की गुहार कर रहे थे। आस-पास के गांवों में लोगों में दहशत का माहौल है।
कर्मा को तो बड़ी बेरहमी से मारा
कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा के साथ नक्सलियों ने बड़ी बेरहमी दिखाई। बस्तर का टाईगर नाम से चर्चित कर्मा का नक्सलियों ने पहले अपहरण किया और बाद में उनके सिर पर बंदूक के बट से जोरदार प्रहार किया। फिर उन पर ताबड़तोड़ करीब 20 गोलियां दाग दी।
इससे पहले कर्मा के सुरक्षा कर्मियों और नक्सलियों के बीच पहले गोलीबारी हुई लेकिन जब गोलीबारी के बीच सुरक्षा कर्मी भाग खड़े हुए तो नक्सलियों ने कर्मा सहित अन्य कांग्रेसी नेताओं को घेर लिया।
राज्य में जून 2005 से शुरू हुए नक्सल विरोधी आंदोलन सलवा जुडूम का कर्मा ने बेहतर ढंग से नेतृत्व किया था। वह पहले से ही नक्सलियों की हिट लिस्ट में थे। इससे पहले भी उन पर कई बार हमले हुए।
नंदकुमार पटेल और बेटे की क्रूर हत्या
नंदकुमार पटेल और उनके बेटे को उठाकर ले गए नक्सलियों ने गोलियों से भून डाला। इस हमले में बचकर आए कांग्रेस विधायक कवासी लकमा ने बताया कि जब वे लौट रहे थे तो उस तरफ से दनादन गोलिया चलने की आवाज सुनाई दी जहां नंदकुमार पटेल और उनके बेटे को ले जाया गया। नक्सलियों ने बिना देर किए बाप-बेटे की एक दूसरे के सामने जान ले ली।