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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस: ईडी ने सौम्या चौरसिया को स्पेशल कोर्ट में किया पेश

Wed, 17 Dec 2025 12:33 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Wed, 17 Dec 2025 12:33 PM IST
सार

ईडी ने शराब घोटाले मामले में गिरफ्तार राज्य प्रशासनिक सेवा की निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया को ईडी की स्पेशल कोर्ट रायपुर में पेश किया। इससे पूर्व मंगलवार को पूछताछ के बाद ईडी ने सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार किया था। 

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Liquor scam case: ED produces Soumya Chaurasia before special court in Chhattisgarh
ईडी ने सौम्या चौरसिया को स्पेशल कोर्ट में किया पेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ईडी ने आज बुधवार को तीन हजार दो सौ करोड़ रुपए के शराब घोटाले मामले में गिरफ्तार राज्य प्रशासनिक सेवा की निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया को ईडी की स्पेशल कोर्ट रायपुर में पेश किया। इससे पूर्व मंगलवार को पूछताछ के बाद ईडी ने सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार किया था। ईडी उनसे अब आगे की पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने के लिए आज स्पेशल कोर्ट में पेश किया है।
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प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी ने मंगलवार को शराब घोटाला में पूछताछ के लिए चौरसिया को बुलाया था। लंबी पूछताछ करने के बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था। 

बता दें कि शराब घोटाले मामले में अब तक पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर  की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके साथ ही आबकारी विभाग के 28 अधिकारी भी आरोपी बनाए गए थे। फिलहाल,  इन सभी कोसुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
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जानें क्या हैं दो हजार करोड़ का शराब घोटाला
ईडी की जांच के मुताबिक, पूर्व कांग्रेस सरकार में उच्च स्तरीय अधिकारियों, निजी व्यक्तियों और राजनीतिक अधिकारियों वाला एक सिंडिकेट काम कर रहा था। छत्तीसगढ़ में शराब व्यापार में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया। साल 2019-22 में दो हजार करोड़ रुपये से अधिक काले धन की कमाई हुई। मनी लॉन्ड्रिंग मामला 2022 में दिल्ली की एक अदालत में दायर आयकर विभाग की चार्जशीट से उपजा है। पूर्व की कांग्रेस सरकार पर आरोप है कि सीएसएमसीएल (शराब की खरीद और बिक्री के लिए राज्य निकाय) से शराब खरीदने के दौरान रिश्वतखोरी हुई। प्रति शराब मामले के आधार पर राज्य में डिस्टिलर्स से रिश्वत ली गई और देशी शराब को ऑफ-द-बुक बेचा गया। ईडी के मुताबिक, डिस्टिलर्स से कार्टेल बनाने और बाजार में एक निश्चित हिस्सेदारी की अनुमति देने के लिए रिश्वत ली गई थी।
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जनवरी 2024 में हुई थी एफआईआर 
एसीबी और ईओडब्ल्यू ने ईडी के पत्र के आधार पर जनवरी 2024 में एफआईआर दर्ज की है। ईओडब्ल्यू के दर्ज एफआईआर में अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर को शराब घोटाला का मास्टरमाइंड बताया गया है। एफआईआर में शामिल बाकी आईएएस और अन्य सरकारी ऑफिसर और लोग सहयोग किये थे। शराब घोटाला से होने वाली आमदनी का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं तीनों को जाता था। टुटेजा आईएएस ऑफिसर हैं, जब  घोटाला हुआ तब वे वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव थे। दूरसंचार सेवा से प्रतिनियुक्ति पर आए त्रिपाठी आबकारी विभाग के विशेष सचिव और छत्तीसगढ़ मार्केटिंग कॉर्पोरेशन के एमडी थे। वहीं अनवर ढेबर रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के बड़े भाई और शराब कारोबारी है। 
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