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रंग पंचमी: पंतोरा में लट्ठमार होली पर कन्याओं ने लोगों को छड़ी से मारा, नहीं आती है कोई बीमारी; ये है मान्यता
Wed, 19 Mar 2025 06:43 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, जांजगीर चांपा
अमर उजाला नेटवर्क, जांजगीर चांपा
Published by: श्याम जी.
Updated Wed, 19 Mar 2025 06:43 PM IST
सार
पंतोरा गांव से रंग पंचमी के दिन गुजरने वाले लोग भी छड़ी खाने के लिए तैयार दिखे। कन्याओं की छड़ी से मार खाने के बाद भी लोग मुस्कुराते नजर आए।
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रंग पंचमी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जांजगीर चांपा जिले के पंतोरा गांव में रंग पंचमी के अवसर पर लट्ठमार होली का आयोजन किया गया। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्रामीण और कुंवारी कन्याओ ने मां भवानी मंदिर के साथ बांस की छड़ी की पूजा की और देवी-देवताओं पर छड़ी बरसाने के बाद गांव में घूमकर लोगों को निरोगी रखने के लिए छड़ी बरसाई।
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पंतोरा गांव ने बरसाने की होली की तर्ज लट्ठमार होली का आयोजन किया गया। रंग पंचमी के अवसर गांव की महिलाएं, बच्चे और युवा सभी एक रंग में रंगे नजर आए। मां भवानी की पूजा करने के बाद मड़वा रानी के जंगल से लाए बांस की छड़ी को अभिमंत्रित किया और देवी-देवताओं पर छड़ी बरसाने के बाद कुंवारी कन्याओं की टोली गाजा बाजा के साथ गांव में पहुंची। गांव के लोग छड़ी लिए कन्याओं के स्वागत में रंग ग़ुलाल की बौछार की और कन्याओं ने छड़ी खाकर रोग मुक्त होने का आशीष लिया।
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गांव में रोग नहीं आता
वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी गांव में हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस दिन का लोगों को साल भर से इंतजार रहता है। गांव की बुजुर्ग महिला बताती हैं कि भवानी मां के आशीर्वाद के रूप में छड़ी खाने से गांव में रोग नहीं आता। वहीं, मंदिर के बैगा ने बताया कि इस परंपरा की शुरुआत कब से हुई इसका पता नहीं, लेकिन परंपरा को आज भी निभा रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि माता भवानी और मड़वा रानी मां की पूजा से गांव में किसी तरह की बीमारी नहीं आती और देवी के रुप में कुंवारी कन्याओं से छड़ी की पूजा कराकर गांव में छोटे बड़े भी को घर-घर जा कर छड़ी मार कर आशीर्वाद दिया जाता है।
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