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महतारी वंदन योजना: KYC के लिए दो मार्च है अंतिम तिथि, बैंकों के बाहर रात से ही बैठे ग्रामीण; नहीं मिल रहा टोकन
Thu, 29 Feb 2024 03:47 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही
Published by: श्याम जी.
Updated Thu, 29 Feb 2024 03:47 PM IST
सार
गौरेला पेंड्रा मरवाही यहां आसपास के लगभग 50 किलोमीटर दूर के ग्रामीण देर रात से बैंकों के बाहर सिर्फ अपना टोकन प्राप्त करके केवाईसी करने के लिए ठंड में पूरी रात रतजगा करते हैं। लाभार्थी बनने के लिए ग्रामीणों को संघर्ष करना पड़ रहा है।
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केवाईसी के लिए बैंक के बाहर खड़े ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महतारी वंदन योजना और किसान न्याय योजना में लाभार्थी बनने के लिए ग्रामीणों को संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीण स्टेट बैंक की उदासीनता का खामियाजा भुगत रहे हैं। ग्रामीण रात को दो बजे से स्टेट बैंक के सामने बैठकर सुबह 10:00 बजे केवाईसी के लिए टोकन लेते हैं। सैकड़ों ग्रामीण पूरी रात बैंक के सामने मौजूद रहते हैं। प्रतिदिन सिर्फ 50 ग्रामीणों का केवाईसी करने से स्थिति खराब हो रही है। बिना केवाईसी के ग्रामीणों के खातों में योजना का पैसा नहीं आएगा। महतारी वंदन योजना में लाभार्थी बनने के लिए सभी औपचारिकताएं दो मार्च से पहले पूरी करनी हैं।
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एसबीआई बैंक की हठधर्मिता और स्थानीय प्रशासन की अनदेखी बैंक खाता धारकों के लिए परेशानी का सबब बन गयी है। सरकार ने योजनाओं का पैसा सीधे खाताधारकों और लाभार्थियों को पहचाने के लिए डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (DBT) शुरू किया। इसके लिए हर ग्रामीण का खाता बैंकों में खोला गया, जिसमें जन धन खातों से लेकर बचत खाता तक शामिल है। विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे महतारी वंदन योजना, किसान न्याय योजना से मिलने वाली राशि का लाभ उठाना ग्रामीणों के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है।
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दरअसल, हर नई योजना के क्रियान्वन एवं उसके लाभार्थी बनने के लिए लाभार्थी ग्रामीणों को अपने खातों में केवाईसी करना अनिवार्य है। ज्यादातर बैंकों में केवाईसी उनके कियोस्क शाखाओं में हो जाती है, लेकिन एसबीआई में केवाईसी के लिए अब बैंक के शाखा कार्यालयों में जाना अनिवार्य है। ऐसे में शाखा कार्यालय में प्रतिदिन सिर्फ 50 ग्रामीणों की ही केवाईसी करना परेशानी का सबक बन गया है। स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में होने वाली केवाईसी से ग्रामीण किस तरह परेशानियों से दो-चार हो रहे हैं इसकी बानगी नज़र आती है।
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गौरेला पेंड्रा मरवाही यहां आसपास के लगभग 50 किलोमीटर दूर के ग्रामीण देर रात से बैंकों के बाहर सिर्फ अपना टोकन प्राप्त करके केवाईसी करने के लिए ठंड में पूरी रात रतजगा करते हैं। वैसे बैंकों के खुलने का समय सुबह 10:00 बजे से है, लेकिन इसके 12 घंटे पहले से ग्रामीण इसलिए बैंकों के सामने बैठ जाते हैं, क्योंकि बैंक प्रतिदिन 50 ग्रामीणों का ही केवाईसी करता है। ऐसे में जिस ग्रामीण को पहले 50 व्यक्तियों में टोकन मिल जाता है उनका केवाईसी हो जाता है अन्यथा उन्हें अगले दिन आना पड़ेगा।
इस पूरे सिस्टम में भी यदि लिंक फेल हो गया तो फिर से टोकन लेना पड़ेगा। कुछ ऐसे भी ग्रामीण मिले जो तीन-चार दिनों से लगातार केवाईसी करने के लिए स्टेट बैंक के सामने पहुंचते हैं और बिना केवाईसी कराए वापस लौट जाते हैं। कुछ तो एक महीने से चक्कर लगा रहे हैं। मामले में महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शहर के मध्य में मौजूद होने के बावजूद न तो किसी जनप्रतिनिधि, न ही स्थानीय प्रशासन ने और न ही बैंक प्रशासन ने ग्रामीण की इन परेशानियों की ओर ही ध्यान दिया।