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Korba: खदान विस्तार से खतरे में नरईबोध के ग्रामीण, पुनर्वास में देरी पर पार्षद ने डिप्टी सीएम को सौंपा ज्ञापन

Fri, 24 Jul 2026 07:36 PM IST
कोरबा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा Published by: कोरबा ब्यूरो Updated Fri, 24 Jul 2026 07:36 PM IST
सार

कोरबा एसईसीएल की गेवरा खदान के विस्तार से ग्राम नरईबोध के ग्रामीणों की सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान गांव से 50 मीटर से भी कम दूरी तक पहुंच चुकी है।

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Villagers of Naraibodh in danger due to mine expansion, councilor submitted memorandum to Deputy CM on delay i
पुनर्वास में देरी पर पार्षद ने डिप्टी सीएम को सौंपा ज्ञापन

विस्तार

कोरबा एसईसीएल की गेवरा खदान के विस्तार से ग्राम नरईबोध के ग्रामीणों की सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान गांव से 50 मीटर से भी कम दूरी तक पहुंच चुकी है। रोजाना होने वाली भारी ब्लास्टिंग से मकानों की दीवारों और छतों में दरारें पड़ रही हैं, जबकि कई घरों की छतों पर बड़े पत्थर गिर रहे हैं। इसके बावजूद पुनर्वास कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है।
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इसी मुद्दे को लेकर नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा के वार्ड क्रमांक-29 नरईबोध-गेवरा बस्ती की पार्षद एवं पीआईसी सदस्य अमिला पटेल ने छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं कोरबा जिला प्रभारी मंत्री अरुण साव को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। ज्ञापन में उन्होंने एसईसीएल प्रबंधन और प्रशासन पर ग्रामीणों की समस्याओं की अनदेखी तथा दमनात्मक कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
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पार्षद अमिला पटेल ने कहा कि खदान विस्तार से नरईबोध पूरी तरह प्रभावित हो चुका है। वर्षों से विस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों का अब तक समुचित पुनर्वास नहीं हो सका है। लगातार हो रही ब्लास्टिंग के कारण लोग अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और महिलाएं व बच्चे भय के माहौल में रहने को मजबूर हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि जब ग्रामीण सुरक्षा, उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं, तब एसईसीएल प्रबंधन उनके खिलाफ भारी जुर्माना लगाकर झूठी एफआईआर दर्ज कराता है। इसे उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।

ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें
  • नरईबोध के पुनर्वास और बसाहट की समय-सीमा तय कर कार्य प्राथमिकता से पूरा कराया जाए।
  • गांव के समीप हो रही भारी ब्लास्टिंग पर तत्काल रोक लगाकर सुरक्षा मानकों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
  • ब्लास्टिंग से क्षतिग्रस्त मकानों का निष्पक्ष सर्वे कर पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाए।
  • भू-विस्थापित ग्रामीणों पर लगाए गए जुर्माने और दर्ज कथित झूठी एफआईआर तत्काल निरस्त की जाए।

पार्षद ने एसईसीएल गेवरा के वर्तमान सीजीएम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि दीपका में पदस्थापना के दौरान भी उन्होंने ग्रामीणों पर फर्जी पेनाल्टी और मुकदमे दर्ज कराए थे तथा अब वही रवैया गेवरा क्षेत्र में भी अपनाया जा रहा है।


इस संबंध में भेजे गए ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन, विधायक प्रेमचंद पटेल, कोरबा कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एसईसीएल के सीएमडी और खान सुरक्षा महानिदेशक को भी भेजी गई है। पार्षद ने मांग की है कि मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर प्रभावित ग्रामीणों को राहत दिलाई जाए।

 

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