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Khelo India Tribal Games 2026: मछुआरे से गोल्ड मेडलिस्ट तक का सफर, अब्दुल फताह ने रचा इतिहास
Fri, 03 Apr 2026 06:17 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 03 Apr 2026 06:17 PM IST
सार
अब्दुल फताह ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में लंबी कूद में स्वर्ण पदक जीतकर न केवल अपना सपना पूरा किया, बल्कि लक्षद्वीप के खेल इतिहास में भी नया अध्याय जोड़ दिया।
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अब्दुल फताह ने रचा इतिहास
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लक्षद्वीप के एक छोटे से द्वीप से निकलकर एक युवा खिलाड़ी ने अपनी मेहनत और जुनून से खेल जगत में नई पहचान बना ली है। अब्दुल फताह ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में लंबी कूद में स्वर्ण पदक जीतकर न केवल अपना सपना पूरा किया, बल्कि लक्षद्वीप के खेल इतिहास में भी नया अध्याय जोड़ दिया।
अब्दुल फताह की कहानी संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। रात में समुद्र में मछली पकड़कर परिवार का सहारा बनने वाले फताह सुबह होते ही मैदान में अभ्यास के लिए पहुंच जाते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया।
जगदलपुर में आयोजित प्रतियोगिता के फाइनल में फताह ने 7.03 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा और वे लक्षद्वीप के पहले ऐसे एथलीट बन गए, जिन्होंने लंबी कूद में 7 मीटर का आंकड़ा पार किया।
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आर्थिक तंगी के कारण फताह को 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी, लेकिन उन्होंने खेल को अपना लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ने का फैसला किया। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने अपने सपनों को जिंदा रखा।
दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में उनका झुकाव फुटबॉल की ओर था, लेकिन एक स्थानीय प्रतियोगिता के दौरान कोच की नजर उनकी प्रतिभा पर पड़ी और उन्होंने एथलेटिक्स की ओर रुख किया। इसके बाद उन्होंने लॉन्ग जंप और स्प्रिंट में मेहनत शुरू की और कम समय में बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली।
लक्षद्वीप में आधुनिक खेल सुविधाओं की कमी के बावजूद फताह जैसे खिलाड़ी मिट्टी के ट्रैक और साधारण मैदानों में अभ्यास कर रहे हैं। सिंथेटिक ट्रैक या बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर न होने के बावजूद उनका यह प्रदर्शन और भी खास बन जाता है।
फताह की यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे लक्षद्वीप के लिए गर्व का क्षण है। अब उन्हें उम्मीद है कि इस सफलता के बाद बेहतर सुविधाएं और अवसर मिलेंगे, जिससे वे भविष्य में और बड़े स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकें।
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अब्दुल फताह की कहानी संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। रात में समुद्र में मछली पकड़कर परिवार का सहारा बनने वाले फताह सुबह होते ही मैदान में अभ्यास के लिए पहुंच जाते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया।
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जगदलपुर में आयोजित प्रतियोगिता के फाइनल में फताह ने 7.03 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा और वे लक्षद्वीप के पहले ऐसे एथलीट बन गए, जिन्होंने लंबी कूद में 7 मीटर का आंकड़ा पार किया।
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आर्थिक तंगी के कारण फताह को 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी, लेकिन उन्होंने खेल को अपना लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ने का फैसला किया। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने अपने सपनों को जिंदा रखा।
दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में उनका झुकाव फुटबॉल की ओर था, लेकिन एक स्थानीय प्रतियोगिता के दौरान कोच की नजर उनकी प्रतिभा पर पड़ी और उन्होंने एथलेटिक्स की ओर रुख किया। इसके बाद उन्होंने लॉन्ग जंप और स्प्रिंट में मेहनत शुरू की और कम समय में बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली।
लक्षद्वीप में आधुनिक खेल सुविधाओं की कमी के बावजूद फताह जैसे खिलाड़ी मिट्टी के ट्रैक और साधारण मैदानों में अभ्यास कर रहे हैं। सिंथेटिक ट्रैक या बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर न होने के बावजूद उनका यह प्रदर्शन और भी खास बन जाता है।
फताह की यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे लक्षद्वीप के लिए गर्व का क्षण है। अब उन्हें उम्मीद है कि इस सफलता के बाद बेहतर सुविधाएं और अवसर मिलेंगे, जिससे वे भविष्य में और बड़े स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकें।