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नक्सल पीड़ित परिवार का हुक्का-पानी बंद: लेन-देन पर 2000 जुर्माना; विधवा का युवक से बात करने पर दबंगों का फरमान

Tue, 02 May 2023 02:29 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कांकेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कांकेर Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Tue, 02 May 2023 02:29 PM IST
सार

महिला के परिवार ने इसे लेकर कलेक्टर से शिकायत की है। इस संबंध में जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन अभी तक कोई प्रशासनिक अफसर नहीं पहुंचा है। वहीं महिला की बेटी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह दबंगों की धमकी के डर से घर में कैद होने की बात कह रही है। 
 

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social boycott of naxal victim family on widow talking to young man in kanker
सामाजिक बहिष्कृत की गई महिला और उसकी बेटी का वीडियो हो रहा वायरल। - फोटो : संवाद

विस्तार

छत्तीसगढ़ के कांकेर में नक्सल प्रभावित गांव में दबंगों ने एक विधवा के परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया है। उससे किसी भी तरह का लेनदेन करने या फिर बात करने पर दो हजार रुपये जुर्माने का फरमान जारी किया है। महिला की गलती सिर्फ इतनी थी कि अचानक सड़क पर तबीयत खराब होने पर पहले से बहिष्कृत एक युवक ने उसे बाइक से घर तक छोड़ा था। फिलहाल महिला अपनी दो बेटियों के साथ घर में कैद है। दबंगों ने उसे गांव छोड़कर जाने को कहा है। परिवार ने इस संबंध में कलेक्टर से शिकायत की है। 

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नक्सलियों ने कर दी थी पति की हत्या
दरअसल, सारा मामला नक्सल प्रभावित पंचायत विकासपल्ली के पीवी 105 गांव का है। यहां रहने वाली सुषमा हालदार के पति की करीब 10 साल पहले नक्सलियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। नक्सलियों को उस पर पुलिस मुखबिरी का शक था। इसके बाद महिला अपनी दो बेटियों को लेकर जगदलपुर चली गई। गांव में हालात ठीक हुए थे, वह फिर लौटी है। उसकी एक बेटी 19 और दूसरी 15 साल की है। दोनों बेटियां पढ़ती हैं। जबकि महिला सुषमा गांव के ही स्कूल में रसोइया का काम करती है। 
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बहिष्कृत युवक ने घर छोड़ा तो उसे पीटा गया
महिला ने कलेक्टर को सौंपी शिकायत में कहा है कि, गांव के कुछ गुंडे किस्म के लोग उसे आए दिन परेशान करते हैं। गांव के एक युवक का पूर्व में बहिष्कार किया जा चुका है। सुषमा ने बताया कि एक दिन जब वह साप्ताहिक बाजार से घर लौट रही थी, तो रास्ते में चक्कर आ गया। इस पर उसी युवक ने बाइक से घर तक पहुंचाया। इससे नाराज होकर गांव के गुंडों ने युवक से मारपीट की। फिर 29 अप्रैल की रात गांव में मीटिंग की गई और उसके परिवार का भी सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। इसकी जानकारी पड़ोसी ने दी। 
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बेटियों को भी स्कूल भेजने पर दी धमकी
पड़ोसी की ओर से महिला को बताया गया कि गांव में किसी से भी लेनदेन करने पर रोक लगा दी है। उसे पीने का पानी भी नहीं मिलेगा। न कोई महिला के घर आएगा और न वह किसी के घर जा सकेगी। सरकारी राशन नहीं मिलेगा, दुकान से भी खरीदी नहीं कर सकेगी। किसी के भी बात करने पर दो हजार जुर्माना लगेगा। उसे रसोइया का काम भी छोड़ना पड़ेगा। महिला ने शिकायत में आरोप लगाया है कि, उसने मुखिया के घर जाकर बात की, गांव छोड़ने की धमकी दी। साथ ही कहा कि बेटी स्कूल गई तो कुछ भी हो सकता है। 

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