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Kanker Crime: टावर लगवाने के नाम पर आठ लाख की ठगी, 15 लाख रुपये, सरकारी नौकरी और बाइक मिलने का दिया झांसा

Wed, 12 Jul 2023 10:00 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कांकेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कांकेर Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Wed, 12 Jul 2023 10:00 PM IST
सार

कांकेर में पुलिस ने शातिर ठग को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया है। पकड़े  गए आरोपी ने मोबाइल टावर लगाने का झांसा देकर आठ लाख रुपये की ठगी की थी। आरोपी ने टावर लगवाने पर 15 लाख रुपये, सरकारी नौकरी और बाइक मिलने की बात कही थी। इसके बाद झांसा देकर अलग-अलग चीजों के नाम पर खाते में रुपये ट्रांसफर करा लिए।

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Accused of cheating eight lakhs in the name of installation of tower arrested in kanker
पुलिस गिरफ्त में आरोपी। - फोटो : संवाद

विस्तार

छत्तीसगढ़ के कांकेर में पुलिस ने शातिर ठग को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया है। पकड़े  गए आरोपी ने मोबाइल टावर लगाने का झांसा देकर आठ लाख रुपये की ठगी की थी। आरोपी ने टावर लगवाने पर 15 लाख रुपये, सरकारी नौकरी और बाइक मिलने की बात कही थी। इसके बाद झांसा देकर अलग-अलग चीजों के नाम पर खाते में रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद भी जब टावर नहीं लगा तो ठगी का अहसास होने पर व्यापारी ने करीब दो साल पहले रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामला चारा थाना क्षेत्र का है। 

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एडिशनल एसपी अविनाश ठाकुर ने बताया कि लखनपुरी निवासी चन्द्रप्रकाश भुतड़ा का जनरल स्टोर है। 29 जुलाई 2021 को अखबार में एक विज्ञापन प्रकाशित हुआ था, जिसमें मोबाइल टावर लगाकर रुपये कमाने की बात कही गई थी। इस पर चंद्र प्रकाश ने विज्ञापन में दिए नंबर पर संपर्क किया। कॉल रिसीव करने वाले ने बताया कि, खुद की जमीन पर टावर लगवाने पर पहले 15 लाख रुपये एडवांस मिलेगा, फिर 60 लाख खाते में जमा होंगे। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और बाइक मिलेगी। 
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ठग की बातों में आकर चंद्रप्रकाश ने मोबाइल टावर लगाने की सहमति दे दी। इसके बाद शातिर ने उससे फोटो, आधार कार्ड, पैन कार्ड और जमीन का दस्तावेज मांगे। इस पर चंद्रप्रकाश ने दो अगस्त को सभी दस्तावेज भेज दिया। फिर तीन अगस्त को रजिस्ट्रेशन के लिए एक हजार रुपये खाते में जमा कराए। उसके बाद एग्रीमेंट और 15 लाख के चेक की कॉपी व्हॉटसएप पर भेजी। उसके प्रोसेस के नाम पर 7900 रुपये, बीमा टीडीएस, आरटीओ, बैंक मैनेजर के तीन प्रतिशत सहित अन्य की फीस के नाम पर रुपये जमा कराए। 
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करीब एक महीना बीतने के बाद भी जब टावर नहीं लगा तो चंद्रप्रकाश ने फिर आरोपी से संपर्क किया, लेकिन बात नहीं हो पाई। बार-बार नंबर बंद आने पर चंद्रप्रकाश पुलिस के पास पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने नंबरों और खाते के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू की और करीब दो साल बाद उन्हें पकड़ा जा सका। पकड़ा गया आरोपी वाराणसी के राजवाड़ी चौबेपुर निवासी अखिलेश मिश्रा (50) है। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। 

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