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CG: भड़काऊ बयानबाजी के मामले में फरार घोषित जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी प्रमुख अमित बघेल ने थाने में किया सरेंडर
Fri, 05 Dec 2025 03:09 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 05 Dec 2025 03:09 PM IST
सार
रायपुर में अग्रवाल और सिंधी समाज के ईष्ट देव के खिलाफ विवादित टिप्पणी मामले में कई दिनों से पुलिस की तलाश से बच रहे जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल ने आखिरकार देवेंद्र नगर थाने में आत्मसमर्पण कर दिया।
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जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी प्रमुख अमित बघेल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रायपुर में अग्रवाल और सिंधी समाज के ईष्ट देव के खिलाफ विवादित टिप्पणी मामले में कई दिनों से पुलिस की तलाश से बच रहे जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल ने आखिरकार देवेंद्र नगर थाने में आत्मसमर्पण कर दिया। थाने पहुंचने के दौरान बड़ी संख्या में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के समर्थक मौजूद थे, जिसके चलते क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। पुलिस ने पहले से ही बघेल को फरार घोषित कर रखा था और उसकी गिरफ्तारी पर पाँच हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।
देवेंद्र नगर और कोतवाली दोनों थानों में बघेल के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था। ईष्ट देव पर की गई टिप्पणी के बाद समाजों में गुस्सा बढ़ता गया और पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी थी। अधिकारियों के अनुसार, बघेल लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहा था, जिसके चलते उसे भगोड़ा घोषित किया गया था। बुधवार को वह अपने वकील के साथ थाने पहुंचा और औपचारिक रूप से सरेंडर कर दिया।
सरेंडर के दौरान माहौल में तनाव भी देखने को मिला। मौके पर मौजूद छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के जिला महामंत्री मनोज साहू ने आरोप लगाया कि बघेल ने स्वयं सरेंडर की सूचना पुलिस को दी थी, फिर भी पुलिस ने अनावश्यक तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न की। उनका कहना था कि पुलिस ने जानबूझकर भीड़ में धक्का-मुक्की जैसा माहौल बनाया, जबकि कई गंभीर मामलों में शामिल अन्य आरोपी खुले घूम रहे हैं। साहू ने यह भी दावा किया कि बघेल छत्तीसगढ़ की संस्कृति के समर्थक हैं और उन्हें जल्द राहत मिलनी चाहिए, ताकि वे अपनी माता के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्य पूरे कर सकें। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रवक्ता दीपक साहू ने भी जल्द रिहाई की मांग दोहराई।
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विवाद की शुरुआत 27 अक्टूबर को हुई थी, जब बघेल ने छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अग्रसेन महाराज और सिंधी समाज के ईष्ट देव झूलेलाल के संदर्भ में विवादित टिप्पणी कर दी थी। इस बयान के बाद दोनों समाजों में नाराज़गी फैल गई और राज्य के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन होने लगे। रायपुर, रायगढ़, सरगुजा समेत कई क्षेत्रों में समाजजनों ने कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन भी सौंपे। सिंधी समाज द्वारा कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने बघेल की तलाश तेज कर दी थी।
यह विवाद 26 अक्टूबर को रायपुर के वीआईपी चौक में छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने से शुरू हुआ था। घटना के अगले दिन बघेल मौके पर पहुंचा और विरोध प्रदर्शन के दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी देखने को मिली। बाद में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया था और जिसने नशे की हालत में मूर्ति तोड़ने की बात कबूली थी।
अग्रवाल और सिंधी समाज ने बघेल की टिप्पणी को धार्मिक आस्था पर सीधा प्रहार बताया था, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर धरना-प्रदर्शन तक कई स्तरों पर विरोध तेज हो गया। लगातार दबाव और बढ़ती नाराज़गी को देखते हुए पुलिस ने बघेल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके बाद अब उसका आत्मसमर्पण सामने आया है।
बघेल के सरेंडर के बाद पुलिस अब मामले की आगे की कानूनी कार्यवाही में जुट गई है। समर्थकों की भीड़ और तनाव को देखते हुए थाने के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। आने वाले दिनों में अदालत में उसकी जमानत याचिका को लेकर भी स्थितियां स्पष्ट होंगी।
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देवेंद्र नगर और कोतवाली दोनों थानों में बघेल के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था। ईष्ट देव पर की गई टिप्पणी के बाद समाजों में गुस्सा बढ़ता गया और पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी थी। अधिकारियों के अनुसार, बघेल लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहा था, जिसके चलते उसे भगोड़ा घोषित किया गया था। बुधवार को वह अपने वकील के साथ थाने पहुंचा और औपचारिक रूप से सरेंडर कर दिया।
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सरेंडर के दौरान माहौल में तनाव भी देखने को मिला। मौके पर मौजूद छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के जिला महामंत्री मनोज साहू ने आरोप लगाया कि बघेल ने स्वयं सरेंडर की सूचना पुलिस को दी थी, फिर भी पुलिस ने अनावश्यक तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न की। उनका कहना था कि पुलिस ने जानबूझकर भीड़ में धक्का-मुक्की जैसा माहौल बनाया, जबकि कई गंभीर मामलों में शामिल अन्य आरोपी खुले घूम रहे हैं। साहू ने यह भी दावा किया कि बघेल छत्तीसगढ़ की संस्कृति के समर्थक हैं और उन्हें जल्द राहत मिलनी चाहिए, ताकि वे अपनी माता के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्य पूरे कर सकें। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रवक्ता दीपक साहू ने भी जल्द रिहाई की मांग दोहराई।
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विवाद की शुरुआत 27 अक्टूबर को हुई थी, जब बघेल ने छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अग्रसेन महाराज और सिंधी समाज के ईष्ट देव झूलेलाल के संदर्भ में विवादित टिप्पणी कर दी थी। इस बयान के बाद दोनों समाजों में नाराज़गी फैल गई और राज्य के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन होने लगे। रायपुर, रायगढ़, सरगुजा समेत कई क्षेत्रों में समाजजनों ने कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन भी सौंपे। सिंधी समाज द्वारा कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने बघेल की तलाश तेज कर दी थी।
यह विवाद 26 अक्टूबर को रायपुर के वीआईपी चौक में छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने से शुरू हुआ था। घटना के अगले दिन बघेल मौके पर पहुंचा और विरोध प्रदर्शन के दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी देखने को मिली। बाद में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया था और जिसने नशे की हालत में मूर्ति तोड़ने की बात कबूली थी।
अग्रवाल और सिंधी समाज ने बघेल की टिप्पणी को धार्मिक आस्था पर सीधा प्रहार बताया था, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर धरना-प्रदर्शन तक कई स्तरों पर विरोध तेज हो गया। लगातार दबाव और बढ़ती नाराज़गी को देखते हुए पुलिस ने बघेल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके बाद अब उसका आत्मसमर्पण सामने आया है।
बघेल के सरेंडर के बाद पुलिस अब मामले की आगे की कानूनी कार्यवाही में जुट गई है। समर्थकों की भीड़ और तनाव को देखते हुए थाने के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। आने वाले दिनों में अदालत में उसकी जमानत याचिका को लेकर भी स्थितियां स्पष्ट होंगी।