{"_id":"6485b9c7969b887a930f499b","slug":"women-growing-chemical-free-vegetables-in-gothans-in-janjgir-champa-2023-06-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"केमिकल फ्री सब्जियां उगा रही महिलाएं: स्व सहायता समूह के जरिए कर रहीं पैदावार, सालाना कमा रहीं डेढ़ लाख रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केमिकल फ्री सब्जियां उगा रही महिलाएं: स्व सहायता समूह के जरिए कर रहीं पैदावार, सालाना कमा रहीं डेढ़ लाख रुपये
Sun, 11 Jun 2023 05:40 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जांजगीर-चांपा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जांजगीर-चांपा
Published by: मोहनीश श्रीवास्तव
Updated Sun, 11 Jun 2023 05:40 PM IST
सार
सब्जी कार्य में अब तक 50 हजार रुपये खर्च करते हुए स्थानीय बाजार में सब्जियों को बेचकर 1 लाख 50 हजार रुपये की प्रतिवर्ष आमदनी प्राप्त की। घर से निकलकर कारोबार कर रही महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी ठीक हुई और वह अपने परिवार का पालन पोषण कर पा रही हैं।
विज्ञापन
गौठानों में सब्जियां उगाकर कमाई कर रही महिलाएं।
- फोटो : संवाद
विस्तार
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में महिलाएं स्व सहायता समूह के जरिए केमिकल फ्री सब्जियां उगा रही हैं। सरकारी सहायता से इन महिलाओं ने गौठान में ही अलग-अलग सब्जियों की पैदावार शुरू की। खास बात यह है कि ये महिलाएं पहले घर का काम खत्म होने के बाद खाली रहती थीं, लेकिन अब 50 हजार रुपये खर्च कर डेढ़ लाख रुपये महीना कमा रही हैं। समूह की महिलाओं ने कहा कि उनको नरवा, गरुआ, घुरवा, बाड़ी से ही गांव में ही रोजगार मिलने लगा है।
विज्ञापन
दरअसल, पामगढ़ विकासखंड के अंतर्गत खोरसी गौठान में स्व सहायता समूह ने सब्जी लगाई है। तीन एकड़ जमीन में बैगन, भिंडी, बरबट्टी की फसल की खेती कर रही हैं। इस समूह की अध्यक्ष आरती चौहान बताती हैं कि महिलाओं के पास विशेष कोई कामकाज नहीं था। ऐसे में स्व सहायता समूह के गठन और गौठान निर्माण के बाद तो जिंदगी में परिवर्तन आ गया। एनआरएलएम से 15 हजार और सामुदायिक निवेश निधि से 60 हजार के साथ बैंक लिंकेज के माध्यम से 1.50 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई।
विज्ञापन
आर्थिक सहायता मिलने से समूह ने गौठान में मिली जमीन पर सब्जियां उगाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे समूह की महिलाओं की मेहनत रंग लाने लगी। शुरूआत में साग-सब्जियों को गांव में भी बेच देते थे। समय के साथ दूसरे गांव के लोगों को भी पता चला कि गौठान में सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है और यह जैविक खाद डालकर उगाई जा रही है। ऐसे में लोगों को लगा कि बाहर से रसायनिक खाद वाली सब्जियों को लाने से अच्छा है कि गांव से ही पौष्टिक सब्जियां लाई जाएं।
विज्ञापन
समूह की महिलाओं को कारोबार बढ़ता चला गया। ऐसा दिन आया जब गांव में रहते हुए ही महिलाओं को आमदनी होने लगी। समूह की अध्यक्ष बताती हैं कि गौठान से जुड़ने के बाद सब्जी उत्पादन से उनके कार्य को सराहा गया। सब्जी कार्य में अब तक 50 हजार रुपये खर्च करते हुए स्थानीय बाजार में सब्जियों को बेचकर 1 लाख 50 हजार रुपये की प्रतिवर्ष आमदनी प्राप्त की। घर से निकलकर कारोबार कर रही महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी ठीक हुई और वह अपने परिवार का पालन पोषण कर पा रही हैं।