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कुंवारी कन्याओं ने लोगों पर बरसाईं छड़ी: जांजगीर-चांपा में होती है लट्ठमार होली, लोगों के कष्ट होते हैं दूर
Sat, 30 Mar 2024 09:50 PM IST
आकाश दुबे
अमर उजाला नेटवर्क, जांजगीर-चांपा
अमर उजाला नेटवर्क, जांजगीर-चांपा
Published by: आकाश दुबे
Updated Sat, 30 Mar 2024 09:50 PM IST
सार
मान्यता के चलते लोग कुंवारी कन्याओं से छड़ियां खाने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं। माना जाता है कि छड़ी खाने से कष्ट दूर होते हैं।
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छड़ी मारती लड़कियां
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले के ग्राम पंतोरा में रंगपंचमी के दिन लट्ठमार होली खेली गई। रंग पंचमी के दिन राधारानी के गांव बरसाने की तर्ज पर लट्ठमार होली का आयोजन किया गया। इसे स्थानीय भाषा में डंगाही होली भी कहा जाता है। जहां कुंवारी कन्याओं के द्वारा लोगों पर छड़ी बरसाई गईं। कुंवारी कन्याओं से छड़ियां खाने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे हुए थे। मान्यता है कि छड़ी खाने से कष्ट दूर होते हैं।
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जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर बलौदा जनपद पंचायत क्षेत्र में पंतोरा गांव है। जहां रंग पंचमी के दिन लट्ठमार होली खेली जाती है। गांव के बुजुर्गो का कहना है कि बस्ती बसने के दौरान गांव में महमारी फैल गई थी। इस दौरान मां भवानी की पूजा-अर्चना शुरू की गई थी। कोरबा जिले के मां मड़वारानी के जंगल से बांस की छड़ी को लाकर माता को समर्पित कि गई थी, जिसके बाद हालात काबू हुआ था। इस परंपरा को आगे विस्तार से ले लिया और गांव के लोग जुड़ते गए।
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इस परंपरा को अब आगे बढ़ाया जा रहा है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी होली के पांचवें दिन इस उत्सव को मनाया गया। जहां गांव का बैंगा मां मड़वारानी के जंगलों में जाकर छड़ी लेकर आते हैं और उसे मां भवानी को समर्पित करते हैं। इस बार भी ऐसा ही किया गया। जहां मां भवानी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई और गांव में किसी प्रकार की महामारी न फैले सभी सुखी रहें, यही कामना की गई। वहीं 9 कुंवारी कन्याओं की मंदिर के अंदर देवी के रूप में पूजा की गई। जिसके बाद उन्हें बांस की छड़ी दी गई, जो मां भवानी को स्पर्श कराती गई थी। वहीं मंदिर के सभी देवी-देवताओं पर छड़ियां बरसाने की पुरानी परंपरा है। पूजा पाठ के बाद कुंवारी कन्या बाहर आती हैं। इसके बाद दूर-दूर से आये लोगों और गांव के लोगों पर जोर-जोर से छड़ी बरसाई जाती हैं। छड़ी पड़ने के दौरान किसी प्रकार का दर्द नहीं होता है।
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