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Janjgir-Champa: जिला मुख्यालय से सटा गांव जर्वे (च) मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा, विधायक ने दी आंदोलन की चेतावनी

Wed, 28 May 2025 05:25 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, जांजगीर-चापा
अमर उजाला नेटवर्क, जांजगीर-चापा Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 28 May 2025 05:25 PM IST
सार

जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम जर्वे (च) एक ऐसा पंचायत है, जहां आज भी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। गांव की सड़क की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां की दुर्दशा देखकर शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता साफ झलकती है।

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Jarve village adjacent to the district headquarters is yearning for basic facilities in Janjgir-Champa
जर्जर सड़क - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम जर्वे (च) एक ऐसा पंचायत है, जहां आज भी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। गांव की सड़क की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां की दुर्दशा देखकर शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता साफ झलकती है। ग्रामीणों की लंबे समय से उठ रही मांग के बावजूद सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। अब इस मुद्दे पर स्थानीय विधायक ब्यास कश्यप ने भी सरकार को घेरा है। विधायक ने ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन की चेतावनी दी है।

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जांजगीर-चांपा जिले के ग्रामीण इलाकों की सड़कों की दशा को ग्राम जर्वे (च) की सड़कों को देखकर समझा जा सकता है।यह वही गांव है, जहां जिले के अधिकांश सरकारी कार्यालय की जमीन स्थित है, लेकिन इसके बावजूद सड़कें कंक्रीट तो दूर, मिट्टी और गड्ढों से भरी हुई हैं। 8 महीने पहले ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर चक्का जाम किया था, लेकिन अधिकारियों के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया था। पंचायत चुनाव भी निपट गए, लेकिन सड़क अब तक वैसी की वैसी है।
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अब विधायक व्यास कश्यप ने भी सड़क की मरम्मत की मांग पर सरकार को चेताया है और फिर से आंदोलन की तैयारी की जा रही है। ग्राम जर्वे (च) की यह सड़क जांजगीर से कई गांवों को जोड़ती है, जिसके कारण बाइक और छोटे वाहन यहां से गुजरते हैं।लेकिन रेत के अवैध परिवहन में लगे भारी वाहनों की आवाजाही ने सड़क को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।गड्ढों और धूल से भरी इस सड़क पर चलना खतरे से खाली नहीं है।छोटे वाहन आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं, और अब लोग इस सड़क पर आना ही नहीं चाहते। गांव की सड़क को सुधारने के लिए PWD विभाग के अधिकारी कई बार आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस काम शुरू नहीं हुआ है। जिला मुख्यालय से जुड़े होने के बावजूद यह गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।“दीया तले अंधेरा” की कहावत इस गांव की हालत पर पूरी तरह चरितार्थ होती है।

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