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सुकमा में ग्राम सभा का प्रस्ताव: ईसाई धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक, चर्च के लिए जमीन नहीं देने का फैसला

Sun, 04 Oct 2026 01:23 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुकमा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुकमा Published by: हिमांशु सिंह बघेल Updated Sun, 04 Oct 2026 01:23 PM IST
सार

सुकमा जिले की पुनपल्ली ग्राम पंचायत की ग्राम सभा ने तीन अक्तूबर को प्रस्ताव पारित कर चर्च निर्माण, प्रार्थना सभा और शव दफनाने समेत अन्य चर्च गतिविधियों के लिए ग्राम सभा की भूमि नहीं देने का फैसला किया है। ग्राम सभा ने सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के संरक्षण का हवाला देते हुए पादरियों और धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक की बात कही है।

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Sukma Gram Sabha Passes Resolution Entry of Christian Missionaries Banned No Land for Churches
ग्राम सभा - फोटो : Social Media

विस्तार

सुकमा जिले की पुनपल्ली ग्राम पंचायत की ग्राम सभा ने एक प्रस्ताव पारित कर ईसाई और धर्मांतरित व्यक्तियों को शव दफनाने, चर्च निर्माण, प्रार्थना सभा तथा अन्य चर्च गतिविधियों के लिए ग्राम सभा की भूमि देने से इनकार कर दिया है। पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण का हवाला देते हुए यह कदम उठाया गया है। ग्राम पंचायत भवन के सूचना पटल पर इस निर्णय का उल्लेख करते हुए पादरियों और ईसाई धर्म प्रचारकों के गांव में प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई है।

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ग्राम सभा ने संविधान और पेसा कानूनों का दिया हवाला
यह प्रस्ताव तीन अक्तूबर को आयोजित ग्राम सभा में पारित किया गया था। निर्णय को सार्वजनिक करने के लिए पंचायत भवन में सूचना पटल लगाया गया है। इस सूचना पटल पर धर्मांतरण, प्रार्थना सभा और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए पादरियों तथा धर्म प्रचारकों का गांव में प्रवेश वर्जित होने का स्पष्ट उल्लेख है। ग्राम सभा ने अपने इस फैसले के आधार के रूप में संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 और छत्तीसगढ़ पेसा कानून 2022 का हवाला दिया है। ग्राम सभा का कहना है कि गांव की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक विरासत के संरक्षण के लिए यह कदम आवश्यक था। जनपद पंचायत सदस्य मड़कम भीमा ने बताया कि यह निर्णय पारंपरिक व्यवस्था, सामाजिक एकता और सामुदायिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम सभा के निर्णयों का सम्मान होना चाहिए और किसी भी विवाद की स्थिति में कानून व संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही समाधान किया जाना चाहिए।

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बैठक में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण रहे मौजूद
इस ग्राम सभा में सरपंच सोनमती माड़वी, ग्राम अध्यक्ष बारसे सोमा, उपसरपंच मुचकी नंदा, ग्राम पटेल बारसे पांडु, पूर्व सरपंच मीडियम जोगा, वार्ड पंच पोडियम भीमा, ग्राम पुजारी बारसे मल्ला और जनपद सदस्य मड़कम भीमा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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प्रदेश में लागू हुआ नया कानून
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 राजपत्र में प्रकाशन के साथ पूरे प्रदेश में लागू हो चुका है। राज्य सरकार ने अवैध धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में शिकायत, जांच, अनुमति और कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया तथा नियम तय कर दिए हैं।

धर्मांतरण को लेकर विवाद बढ़ने का दावा
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा था कि सरकार का मुख्य उद्देश्य कानून का कड़ाई से पालन कराना और अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाना है। छत्तीसगढ़ के बस्तर, जशपुर और रायगढ़ जैसे आदिवासी क्षेत्रों में आदिवासियों को ईसाई धर्म में शामिल कराने को लेकर विवाद बढ़ता रहा है, जो कई स्थानों पर गुटीय संघर्ष का रूप ले चुका है।
उधर, धमतरी जिले के लगभग 30 से 35 चर्चों व प्रार्थना स्थलों के बाहर केवल ईसाइयों के प्रवेश वाले बोर्ड लगाए जाने का मामला भी सामने आया है।

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