{"_id":"8338878f270e517952245e84b30242d1","slug":"issues-in-chhattisgarh-assembly-election","type":"story","status":"publish","title_hn":"'शहादत' की कीमत चतुर्थ श्रेणी की नौकरी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'शहादत' की कीमत चतुर्थ श्रेणी की नौकरी
सुदीप ठाकुर/ अमर उजाला, राजनांदगांव
Updated Tue, 05 Nov 2013 04:29 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस वर्ष 25 मई को बस्तर की जीरम घाटी में कांग्रेस के काफिले पर हुए भीषण हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, सलवा जुड़ूम के शिल्पकार और बस्तर टाइगर के नाम से मशहूर महेंद्र कर्मा सहित जो बड़े नेता मारे गए थे, उनमें राजनांदगांव के पूर्व विधायक उदय मुदलियार भी थे। इस हमले में 30 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें कांग्रेस के छोटे कार्यकर्ता भी थे।
विज्ञापन
इस हमले ने कांग्रेस को रमन सिंह की सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा भी दिया। कांग्रेस इस हमले में मारे गए
लोगों को शहीद बता रही है। तो रमन सरकार भी कहां पीछे रहने वाली थी, उसने शहीदों के लिए अनुकंपा नियुक्ति की पेशकश कर दी।
इसके तहत उदय के साथ मारे गए एक कांग्रेस कार्यकर्ता के बेटे को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी मिल भी चुकी है। मगर चर्चा थी कि उदय मुदलियार के परिजनों को भी नौकरी की पेशकश की गई थी।
विज्ञापन
अमर उजाला से इसकी पुष्टि खुद उदय के बेटे जीतेंद्र ने की। वह कहते हैं, 'इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है कि एक शहीद नेता के बच्चों को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बनाने की पेशकश रमन सरकार ने की थी, जबकि मैं खुद और मेरी बहन दोनों एमबीए हैं।'
विज्ञापन
जीतेंद्र बताते हैं कि उन्होंने बाद में राज्य सरकार को पत्र लिखा कि यदि वह ऐसी कोई पेशकश करना ही चाहती है, तो कम से कम हम दोनों भाई-बहनों की शिक्षा को तो ध्यान में रखकर ही कोई विचार करे। यदि सरकार वाकई गंभीर है, तो मेरी बहन को डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियुक्ति दे सकती थी। ऐसा पहले हुआ भी है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।