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सीजी: छत्तीसगढ़ में कैट की स्थायी पीठ के गठन पर हाईकोर्ट का केंद्र से जवाब तलब

Fri, 16 Oct 2026 03:10 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Fri, 16 Oct 2026 03:10 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने राज्य में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की स्थायी पीठ स्थापित करने की मांग पर केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है।

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HC seeks Centre's response on formation of permanent CAT bench in Chhattisgarh
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की स्थायी पीठ स्थापित करने की मांग पर केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। छत्तीसगढ़ सीनियर लॉयर फोरम की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्रा और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की पीठ ने केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर सक्षम अधिकारी का शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में केंद्र सरकार से स्थायी पीठ के गठन की दिशा में अब तक उठाए गए कदमों और वर्तमान स्थिति की पूरी जानकारी मांगी है। राज्य के सरकारी कर्मचारियों और अन्य पक्षकारों को स्थायी व्यवस्था न होने के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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याचिका में बताया गया है कि बिलासपुर में वर्तमान समय में अधिकरण की सर्किट बेंच केवल सीमित अवधि के लिए ही संचालित होती है। इस व्यवस्था के कारण नए आवेदन जमा करने, दस्तावेज में लिपिकीय त्रुटियों को सुधारने और अन्य प्राथमिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए पक्षकारों को मध्य प्रदेश के जबलपुर जाना पड़ता है। इससे कर्मचारियों के समय और धन दोनों का अतिरिक्त व्यय होता है।
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सर्किट बेंच की सीमाएं और परेशानियां
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता संस्था की ओर से अधिवक्ता बीपी राव, अधिवक्ता विकास बाजपेयी, अधिवक्ता अरविंद सिन्हा और अधिवक्ता पूजा सिन्हा ने पक्ष रखा। अधिवक्ताओं ने पीठ को अवगत कराया कि मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित कैट की मुख्य पीठ की सर्किट बेंच साल में केवल पांच बार ही बिलासपुर आती है। प्रत्येक प्रवास के दौरान यह बेंच केवल एक सप्ताह तक कार्य करती है।
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सीमित कार्यदिवस होने के कारण अधिकांश मामलों की पूरी सुनवाई नहीं हो पाती है। इसके बाद प्रकरणों की ऑनलाइन सुनवाई का सहारा लिया जाता है। इस व्यवस्था के कारण छत्तीसगढ़ के शासकीय सेवकों और उनके अधिवक्ताओं को निरंतर प्रशासनिक कठिनाइयों से जूझना पड़ रहा है। स्थायी पीठ के अभाव में न्याय पाने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल हो गई है।

भूमि आवंटन के बाद भी असुविधाएं
जनहित याचिका में अदालत का ध्यान बुनियादी ढांचे की स्थिति की ओर भी आकर्षित किया गया है। याचिका में कहा गया है कि बिलासपुर में कैट भवन का निर्माण करने के लिए जमीन पहले ही आवंटित की जा चुकी है। इसके बावजूद वर्तमान में सर्किट बेंच का संचालन जिला उपभोक्ता फोरम के प्रथम तल पर स्थित एक छोटे से कमरे से किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता फोरम की दलील है कि राज्य में कैट की स्थायी पीठ गठित होने से पक्षकारों को बार-बार जबलपुर दौड़ने से मुक्ति मिलेगी। इससे न केवल न्यायिक प्रक्रिया सुगम और त्वरित बनेगी, बल्कि प्रशासनिक मामलों के निपटारे के लिए स्थानीय स्तर पर एक सुदृढ़ तथा व्यवस्थित ढांचा भी उपलब्ध हो सकेगा।

राज्य गठन के 25 वर्षों बाद भी पहल नहीं
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से उप सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा और अधिवक्ता अन्नपूर्णा तिवारी ने पक्ष रखा। केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों ने न्यायालय से स्थायी पीठ की स्थापना के लिए अब तक उठाए गए कदमों और वर्तमान स्थिति का ब्योरा देने के लिए सक्षम अधिकारी का शपथपत्र पेश करने हेतु समय मांगा।


इसके पश्चात डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर यह शपथपत्र दाखिल करने का अंतिम निर्देश जारी किया। राज्य शासन की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर और उप शासकीय अधिवक्ता अनुजा शर्मा ने उपस्थिति दर्ज कराई। अविभाजित मध्य प्रदेश के समय केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की स्थापना जबलपुर में की गई थी। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बनने के 25 वर्ष बीत जाने के बाद भी राज्य में कैट की स्थायी बेंच गठित नहीं हो पाई है। इस दिशा में उचित कदम न उठाए जाने से प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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