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GPM: ये कैसा अंधविश्वास...? 8 साल की बच्ची पीलिया से पीड़ित, अस्पताल न ले जाकर घर पर ही देसी इलाज कर रही महिला

Sat, 13 Sep 2025 09:14 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही Published by: विजय पुंडीर Updated Sat, 13 Sep 2025 09:14 AM IST
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A woman is treating a child suffering from jaundice
GPM News - फोटो : अमर उजाला
गौरेला विकासखंड के दूरस्थ बैगा आदिवासी गांव में एक ओर जहां डायरिया के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है तो दूसरी ओर एक और तस्वीर सामने आई है, जहां पर एक 8 साल की बच्ची जो पीलिया से पीड़ित है उसके परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय घर पर ही देसी इलाज करते नजर आ रहे हैं। अस्पताल में इलाज करवाने के सवाल पर उन्होंने बताया कि घर पर कोई नहीं हो जो बच्ची को अस्पताल ले जा सके।
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गौरेला विकासखण्ड के दूरस्थ बैगा बाहुल्य गांव साल्हेघोरी में इन दिनों डायरिया का प्रकोप देखने को मिल रहा है। जहां पर पिता-पुत्री की उल्टी-दस्त से मौत हो गई और गांव के डेढ़ दर्जन लोगों का इलाज अभी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौरेला में जारी है, तो दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग भी गांव में 10 टीमें भेजकर ग्राम पंचायत भवन को अस्थाई रूप से अस्पताल में बदल कर ग्रामीणों का इलाज कर रहा है। तो वहीं इसी गांव से एक ऐसी तस्वीर भी सामने आई जिसमें मीरा बाई बैगा अपनी 8 साल की बेटी शांति बैगा जो पीलिया बीमारी से जूझ रही है उसका अस्पताल में इलाज करवाना छोड़ घर पर ही देसी इलाज करते नजर आई। 
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साल्हेघोरी ग्राम पंचायत के छिरहिटी मोहल्ले में सड़क किनारे मीरा बाई बैगा अपनी 8 साल की बच्ची शान्ति बैगा जो पीलिया बीमारी से जूझ रही है उसका झाड़-फूंक के जरिए इलाज कर रही है। आम के पेड़ के छाल और चुना उस बच्चे के शरीर पर लगाया हुआ मीरा बाई का मानना है कि ऐसा करने से पीलिया बीमारी ठीक हो जाएगी। जब उससे पूछा कि आप बच्ची को अस्पताल में इलाज के लिए क्यों नहीं लेकर जा रहे हो तो उसने बताया कि उसका पति कमाने के लिए बाहर दूसरे शहर गया हुआ है। साथ में एक छोटा बच्चा और है इसलिए वो शान्ति को लेकर अस्पताल नहीं गई। हालांकि, महिला को बताया गया कि पीलिया बीमारी गंभीर बीमारी है और अस्पताल में ही इसका इलाज होगा, जिसपर महिला चुप हो गई। हालांकि मामले की जानकारी तत्काल स्वास्थ्य विभाग के जवाबदारों को दे दी गई है।
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