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कोंडागांव धान खरीदी में अव्यवस्था: किसानों की बढ़ी मुश्किलें, तकनीकी खामियों और कर्मियों की कमी से काम ठप

Mon, 17 Nov 2025 09:52 PM IST
राहुल तिवारी अमर उजाला नेटवर्क, कोंडागांव
अमर उजाला नेटवर्क, कोंडागांव Published by: राहुल तिवारी Updated Mon, 17 Nov 2025 09:52 PM IST
सार

कोंडागांव में धान खरीदी शुरू होते ही अव्यवस्था सामने आई। टोकन कटने के बावजूद किसानों का धान नहीं खरीदा जा सका। लैंप्स कर्मचारियों की हड़ताल के बीच सचिव और पटवारी व्यवस्थाएं संभाल नहीं पा रहे हैं। तकनीकी खामियों और हमालों की कमी से किसान परेशान हैं।
 

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Farmers troubled over chaos in paddy procurement in Kondagaon
कोंडागांव धान खरीदी में अव्यवस्था - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोंडागांव जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 की धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू हो चुकी है, लेकिन शुरुआत से ही अव्यवस्था के कारण किसान भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। सोमवार को खरीदी के तीसरे दिन जिले के 13 धान खरीदी केन्द्रों में कुल 32 टोकन कटे, लेकिन अधिकतर किसानों का धान अब तक खरीदा नहीं जा सका।

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गिरोला और मसोरा धान खरीदी केंद्रों में पहुंचे किसानों ने बताया कि वे ऑनलाइन टोकन लेकर धान बेचने पहुंचे थे, परंतु केंद्रों में व्यवस्थाओं की हालत बेहद खराब है। लैंप्स समिति के कर्मचारी व प्रबंधक हड़ताल पर हैं, ऐसे में शासन–प्रशासन ने ग्राम सचिवों और पटवारियों को खरीदी प्रभारी व प्रबंधक बनाकर तैनात कर दिया है। किसानों का आरोप है कि इन्हें खरीदी शुरू होने से ठीक एक दिन पहले औपचारिक प्रशिक्षण देकर भेज दिया गया, जिससे वे ना तो सिस्टम संभाल पा रहे हैं और ना ही तकनीकी प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से चला पा रहे हैं।
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धान खरीदी केंद्रों में सॉफ्टवेयर की गड़बड़ियों और तकनीकी खामियों के कारण नए प्रबंधक व ऑपरेटर भी असहाय दिख रहे हैं। दूसरी ओर सुबह से केंद्रों में खड़े किसानों का धान देर शाम तक खरीदा नहीं जा सका। किसानों ने बताया कि पानी, बिजली, शौचालय और शेड जैसी मूलभूत सुविधाएं तो हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या हमालों की कमी है। मजदूर न होने की वजह से किसानों को खुद ही बारदाना निकालना, मार्किंग करना, धान भरना और सिलाई तक करनी पड़ रही है। सिलाई के लिए सुतली तक की व्यवस्था उन्हें स्वयं करनी पड़ रही है।
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कांग्रेस ने धान खरीदी में चल रही अव्यवस्था पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। पार्टी का कहना है कि प्रदेश में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होना तय था और लैंप्स समिति के कर्मचारियों की हड़ताल की जानकारी भी सरकार को थी, इसके बावजूद कोई पुख्ता तैयारी नहीं की गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ग्राम पंचायत सचिव और पटवारियों को जल्दबाजी में प्रशिक्षण देकर जिम्मेदारी थमा दी गई, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

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