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बलरामपुर रामानुजगंज: रामचंद्रपुर में धान खरीदी केंद्र बदलने पर किसानों का विरोध, सड़क पर किया चक्का जाम
Mon, 01 Dec 2025 04:55 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर रामानुजगंज
अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर रामानुजगंज
Published by: Digvijay Singh
Updated Mon, 01 Dec 2025 04:55 PM IST
सार
बलरामपुर रामानुजगंज में रामचंद्रपुर धान खरीदी केंद्र को पुराने स्थान पर जगह कम होने और भारी वाहनों की आवागमन समस्या के कारण कालिकापुर कुरशा नाला के उस पार नए स्थान पर शिफ्ट किया गया है।
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किसानों ने किया चक्काजाम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बलरामपुर रामानुजगंज में रामचंद्रपुर धान खरीदी केंद्र को पुराने स्थान पर जगह कम होने और भारी वाहनों की आवागमन समस्या के कारण कालिकापुर कुरशा नाला के उस पार नए स्थान पर शिफ्ट किया गया है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि नया स्थान सुविधाजनक और खरीदी प्रक्रिया के लिए बेहतर है, लेकिन किसानों में यह बदलाव गंभीर नाराज़गी पैदा कर गया है।
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किसानों का कहना है कि नया केंद्र पुराने स्थान से लगभग 3 किलोमीटर दूर और जंगली इलाके में स्थित है, जो हाथियों के विचरण क्षेत्र में आता है। इससे धान बेचकर लौटते समय किसानों को भय का सामना करना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि वर्षों से रामचंद्रपुर में चल रहा परंपरागत खरीदी केंद्र पर्याप्त सुविधाओं और आसान पहुँच के कारण आदर्श था। इस निर्णय को एकतरफा और किसान हितों के विरुद्ध बताया जा रहा है।
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आज नाराज़गी के चलते रामचंद्रपुर–रामानुजगंज–सनावल मार्ग पर सैकड़ों किसानों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए चक्का जाम किया, जिससे दोनों तरफ लंबी वाहनों की कतार लग गई। मौके पर तहसीलदार और नायब तहसीलदार पहुंचे और समझाइश देकर जाम समाप्त करवाया, लेकिन किसान अब भी अड़े हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि धान खरीदी पुराने स्थान पर शुरू नहीं हुई, तो वे पुनः चक्का जाम करेंगे और किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी।
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किसानों का कहना है कि पिछले कुछ दिन में धान खरीदी के लिए कई टोकन कट चुके हैं, जिनमें कुछ निरस्त भी हो गए, और नए टोकन धारक भी धान बेचने में असमर्थ हैं। उनका यह भी कहना है कि नए स्थान पर खरीदी प्रक्रिया सुचारू नहीं हो रही है, जिससे समय पर उपज बेचने में किसानों को परेशानी हो रही है। स्थानीय प्रशासन ने अपील की है कि किसान धैर्य रखें और अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन किसानों की एकजुटता और विरोध ने विभागीय निर्णयों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।