नसबंदी कांड में सात डॉक्टरों पर कार्रवाई
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छत्तीसगढ़ के चर्चित नसबंदी कांड में निजी नर्सिंग होम चलाने वाले सात डॉक्टरों को दोषी करार दिया गया है। राज्य सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की संयुक्त जांच टीम ने इन्हें दोषी पाया। दोषियों के पंजीकरण निलंबित कर दिए गए हैं।
केंद्र सरकार द्वारा गरीबों के लिए वर्ष 2007 में शुरू की गई स्वास्थ्य बीमा योजना की राशि हड़पने के लिए हजारों गरीब महिलाओं का बिना वजह ऑपरेशन कर गर्भाशय निकाल दिया गया था। इस योजना के तहत गरीब परिवार का 30,000 रुपए का बीमा कराया गया था।
इस मामले में कुल नौ डॉक्टरों पर आरोप लगे थे। शुक्रवार को इनमें से सात डॉक्टरों को दोषी पाया गया और उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। डॉक्टर पंकज जायसवाल का पंजीकरण दो साल के निलंबित कर दिया गया है।
दो-दो महीने के लिए निलंबित हुए डॉक्टर
बीबीसी से बातचीत में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने कहा कि डॉ। जायसवाल के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जाएगी। दो अन्य डॉक्टरों का पंजीकरण आठ-आठ महीने के लिए और बाकी दो के पंजीकरण दो-दो महीने के लिए निलंबित कर दिए गए हैं।
हालांकि, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल का कहना है कि इस पूरे मामले में सरकार लीपापोती कर रही है। ये कार्रवाई केवल दिखावे के लिए की गई है। यह मामला पहली बार वर्ष 2012 में प्रकाश में आया। निजी नर्सिंग होम चलाने वाले डॉक्टरों ने कैंसर का भय दिखाकर महिलाओं के गर्भाशय निकाल दिए थे।
बीमा का पैसा हड़पने के लिए हजारों ग्रामीण महिलाओं का आपरेशन कर दिया गया। हाल ही में प्रदेश में नसबंदी कांड ने हाईकोर्ट ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का स्वतः संज्ञान लिया था और स्वास्थ्य विभाग को फटकार लगाई थी।
इसके बाद राज्य सरकार ने गर्भाशय कांड के भी जांच के आदेश दिए थे। संयुक्त जांच टीम ने 26 नवंबर और 12 दिसंबर को डॉक्टरों का पक्ष सुना था।