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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Devotees performed Jalabhishek of Kuleshwarnath Mahadev on Mahashivratri in Gariaband

Gariaband: महाशिवरात्रि पर कुलेश्वरनाथ महादेव का श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक, हर-हर महादेव का किया जयघोष

Fri, 08 Mar 2024 07:06 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, गरियाबंद
अमर उजाला नेटवर्क, गरियाबंद Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 08 Mar 2024 07:06 PM IST
सार

दर्शनार्थियों की लम्बी लाइन कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर और राजीव लोचन मंदिर, बाबा गरीब नाथ की ओर लग गई। श्रद्धालुगण भगवान के दर्शन करने लाइन में डटे अपनी बारी की इंतजार करते रहे। यह सिलसिला तड़के तीन बजे से जारी रहा है।

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Devotees performed Jalabhishek of Kuleshwarnath Mahadev on Mahashivratri in Gariaband
लाइन में लगे महादेव के भक्त - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गरियाबंद में हल्की गुलाबी ठंड के बीच महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शुक्रवार तड़के सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने राजिम के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाकर भोलेनाथ की पूजा अर्चना की। धर्म के प्रति आस्था का जुनून गुरूवार की रात से ही देखने को मिल रहा था। आस्था और श्रद्धा के चलते भोलेनाथ महादेव जी के प्रति अटूट भक्ति रखने वाले भक्त तड़के दो बजे से ही राजिम संगम की धार में डुबकी लगाने पहुंच गए थे। महाशिवरात्रि पर इस पुण्य स्नान को काफी महत्व माना जाता है, इसलिए तड़के सुबह से लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुगण पुण्य स्नान कर दीपदान किया। 

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दर्शनार्थियों की लम्बी लाइन कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर और राजीव लोचन मंदिर, बाबा गरीब नाथ की ओर लग गई। श्रद्धालुगण भगवान के दर्शन करने लाइन में डटे अपनी बारी की इंतजार करते रहे। यह सिलसिला तड़के तीन बजे से जारी रहा है। वैसे महाशिवरात्रि पर्व में स्नान के बाद दीपदान करने की परंपरा कई सौ वर्षों पहले से ही चली आ रही है। इस परंपरा और श्रद्धा का पालन आज भी श्रद्धालुगण करते देखा गया है। नदी की धार में दोने में रखा दीपक की लौ किसी जुगनू की भांति चमकती नजर आई। कई महिलाओं ने रेत का शिवलिंग बना कर बहुत ही श्रद्धा के साथ बेल पत्ता, धतुरा के फूल चढ़ाकर आरती भी किया। मान्यता के अनुसार यहां कई भक्त नदी अपने मासूम बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया है। श्रीकुलेश्वर मंदिर क्षेत्र में जगह-जगह पंडितों का हुजूम भी लगा हुआ था, जहां भगवान श्री सत्यनारायण और शिवजी की कथा भी श्रद्धालुजन करा रहे थे।

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महाशिवरात्रि पर संगम स्नान का है खास महत्व

वैसे तो पर्व व त्योहारों में स्नान का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन महाशिवरात्रि पर त्रिवेणी संगम में स्नान करने का खास कारण है। बताया जाता है महाशिवरात्रि में किसी भी प्रहर अगर भोले बाबा की प्रार्थना कि जाए, तो मां पार्वती और भोलेनाथ सीधे भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते है। भगवान शंकर के शरीर पर शमशान की भस्म, गले में सर्पों की हार, कंठ में विष, जटाओं में पावन गंगा तथा माथे में प्रलयंकारी ज्वाला उनकी पहचान है। माना जाता है कि महानदी, सोंढूर, पैरी के संगम में स्नान करने से तन पवित्र तो होते है बल्कि मन की मलिनता दूर हो जाती है। इस दिन संगम की सूखी रेत पर सूखा लहरा लेने का भी परंपरा है। 

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