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छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर गरमाई सियासत: वामपंथी दलों के सांसदों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लिखा खत
Thu, 31 Jul 2025 05:47 PM IST
ललित कुमार सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Thu, 31 Jul 2025 05:47 PM IST
सार
Conversion and Human trafficking case in Durg CG: छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और मानव तस्करी मामले में सियासत गरमाई हुई है। इसकी चिंगारी अब दिल्ली तक पहुंच गई है।
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विस्तार
Conversion and Human trafficking case in Durg CG: छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और मानव तस्करी मामले में सियासत गरमाई हुई है। इसकी चिंगारी अब दिल्ली तक पहुंच गई है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को घेरने में लगा है। अल्पसंख्यकों को लेकर उन पर जमकर आरोप लगाये जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और मानव तस्करी मामले में कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को लेकर वामपंथी दलों के सांसदों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को खत लिखा है। पत्र लिखकर इस संबंध में शीघ्र हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।
इससे पहले प्रदेश के दुर्ग में दो कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के सांसदों ने भी सोमवार को संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया था। ननों को रिहा करने की मांग की थी। दुर्ग रेलवे स्टेशन पर कथित मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण के आरोप में दो ननों सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई बजरंग दल के एक स्थानीय पदाधिकारी की शिकायत के बाद की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ये तीनों व्यक्ति नारायणपुर की तीन लड़कियों का जबरन धर्मांतरण और तस्करी कर रहे थे।
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन और आईयूएमएल केईटी मोहम्मद बशीर सहित यूडीएफ सांसदों ने संसद भवन परिसर के मकर द्वार के सामने प्रदर्शन किया था। इस दौरान वे पोस्टर लिए हुए थे जिन पर ‘अल्पसंख्यकों पर हमले बंद करो’ लिखा था।
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वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा था कि , “यूडीएफ सांसदों ने दुर्ग (छत्तीसगढ़) में कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी और उत्पीड़न के खिलाफ आज संसद के बाहर प्रदर्शन किया। इन निर्दोष महिलाओं ने कुछ भी गलत नहीं किया लेकिन फिर भी हिंसक भीड़ ने उन्हें निशाना बनाया।” उन्होंने आरोप लगाया, “भाजपा-आरएसएस के परिवेशी तंत्र के तहत सभी अल्पसंख्यकों को अपराधी समझा जाता है और असामाजिक तत्वों को उनकी आस्था का पालन कर रहे नागरिकों को डराने के लिए छोड़ दिया जाता है। छत्तीसगढ़ में बजरंग दल के गुंडों और पुलिस के बीच की यह जुगलबंदी भाजपा की धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति वास्तविक मंशा को दर्शाती है।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि वे ननों की तत्काल रिहाई और उनके साथ न्याय की मांग करते हैं। वेणुगोपाल और केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीसन ने इसे भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों पर हमलों का एक और उदाहरण बताया। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है और संविधान के तहत अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
अब यहां जानिये क्या है पूरा मामला
दुर्ग रेलवे स्टेशन में 25 जुलाई शुक्रवार को इस मामले में जमकर हंगामा हुआ था। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने धर्मांतरण की आशंका को लेकर जमकर प्रदर्शन किया था। बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता स्टेशन परिसर में पहुंचे थे। जय श्रीराम के नारे लगाते हुए विरोध जताया था। स्थिति पर काबू पाने के लिये भारी संख्या में पुलिस बल और जीआरपी को मौके पर तैनात किया गया था। इस प्रकरण में जीआरपी पुलिस ने दो नन और युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच कर रही है। शुरुआती जांच के बाद दो नन और युवक पर धारा 143 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस प्रकरण की जांच कर रही है।
पकड़े गये थे दो नन सिस्टर, एक युवक और तीन आदिवासी युवतियां
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दो नन सिस्टर, एक युवक और तीन आदिवासी युवतियों को घेर रखा था। इन आदिवासी युवतियों को बहला-फुसलाकर यूपी के आगरा में ले जाने का आरोप था। जहां उनके धर्मांतरण की योजना थी। ये तीनों आदिवासी युवतियां नारायणपुर जिले के ग्राम ओरछा की निवासी थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इन लड़कियों की उम्र कम है और इनमें से कोई भी आठवीं कक्षा से आगे की नहीं पढ़ी हैं। इनके माता-पिता को भी इस संबंध में जानकारी नहीं है।
युवक पर ऐसे मामले में शामिल होने का आरोप
छत्तीसगढ़ बजरंग दल पदाधिकारी रवि निगम ने आरोप लगाते हुए कहा कि जो युवक पकड़ा गया था, वह पहले भी इस तरह की घटनाओं में संलिप्त रहा है। आदिवासी लड़कियों का धर्म परिवर्तन करा चुका है। राज्य में धर्म परिवर्तन के खिलाफ कठोर कानून तुरंत लागू किया जाए।
मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार
दुर्ग जीआरपी ने दो ननों को मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, जहां से दो ननो समेत एक युवक को जेल भेज दिया गया था। इतना ही नहीं दो ननों और युवक की गिरफ्तारी के बाद जमानत याचिका लोअर कोर्ट के बाद सेशन कोर्ट ने खारिज कर दी थी। सेशन कोर्ट से जज अनीश दुबे ने कहा हमें यह प्रकरण सुनने का अधिकार नहीं है। यह मानव तस्करी से जुड़ा मामला था,जिसकी सुनवाई बिलासपुर की एनआईए कोर्ट में हो सकती है।
दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करने का आरोप
अब इस मामले में जमकर राजनीति हो रही है। कांग्रेस और सीपीआई के प्रतिनिधि मंडल ननों से मुलाकात कर केंद्रीय जेल पहुंचे थे। मुलाकात के बाद दोनों ही पार्टियों ने सरकार पर दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। दोनों ही राजनीतिक दलों ने प्रदेश की बीजेपी सरकार को आदिवासियों और ईसाईयों का विरोधी करार दिया है। वहीं सीपीआई वरिष्ठ नेत्री वृंदा करात ने कहा है कि झूठे केस में ननों को गिरफ्तार करके जेल में डालना अन्याय है।
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इससे पहले प्रदेश के दुर्ग में दो कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के सांसदों ने भी सोमवार को संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया था। ननों को रिहा करने की मांग की थी। दुर्ग रेलवे स्टेशन पर कथित मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण के आरोप में दो ननों सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई बजरंग दल के एक स्थानीय पदाधिकारी की शिकायत के बाद की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ये तीनों व्यक्ति नारायणपुर की तीन लड़कियों का जबरन धर्मांतरण और तस्करी कर रहे थे।
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संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन और आईयूएमएल केईटी मोहम्मद बशीर सहित यूडीएफ सांसदों ने संसद भवन परिसर के मकर द्वार के सामने प्रदर्शन किया था। इस दौरान वे पोस्टर लिए हुए थे जिन पर ‘अल्पसंख्यकों पर हमले बंद करो’ लिखा था।
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वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा था कि , “यूडीएफ सांसदों ने दुर्ग (छत्तीसगढ़) में कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी और उत्पीड़न के खिलाफ आज संसद के बाहर प्रदर्शन किया। इन निर्दोष महिलाओं ने कुछ भी गलत नहीं किया लेकिन फिर भी हिंसक भीड़ ने उन्हें निशाना बनाया।” उन्होंने आरोप लगाया, “भाजपा-आरएसएस के परिवेशी तंत्र के तहत सभी अल्पसंख्यकों को अपराधी समझा जाता है और असामाजिक तत्वों को उनकी आस्था का पालन कर रहे नागरिकों को डराने के लिए छोड़ दिया जाता है। छत्तीसगढ़ में बजरंग दल के गुंडों और पुलिस के बीच की यह जुगलबंदी भाजपा की धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति वास्तविक मंशा को दर्शाती है।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि वे ननों की तत्काल रिहाई और उनके साथ न्याय की मांग करते हैं। वेणुगोपाल और केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीसन ने इसे भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों पर हमलों का एक और उदाहरण बताया। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है और संविधान के तहत अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
अब यहां जानिये क्या है पूरा मामला
दुर्ग रेलवे स्टेशन में 25 जुलाई शुक्रवार को इस मामले में जमकर हंगामा हुआ था। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने धर्मांतरण की आशंका को लेकर जमकर प्रदर्शन किया था। बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता स्टेशन परिसर में पहुंचे थे। जय श्रीराम के नारे लगाते हुए विरोध जताया था। स्थिति पर काबू पाने के लिये भारी संख्या में पुलिस बल और जीआरपी को मौके पर तैनात किया गया था। इस प्रकरण में जीआरपी पुलिस ने दो नन और युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच कर रही है। शुरुआती जांच के बाद दो नन और युवक पर धारा 143 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस प्रकरण की जांच कर रही है।
पकड़े गये थे दो नन सिस्टर, एक युवक और तीन आदिवासी युवतियां
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दो नन सिस्टर, एक युवक और तीन आदिवासी युवतियों को घेर रखा था। इन आदिवासी युवतियों को बहला-फुसलाकर यूपी के आगरा में ले जाने का आरोप था। जहां उनके धर्मांतरण की योजना थी। ये तीनों आदिवासी युवतियां नारायणपुर जिले के ग्राम ओरछा की निवासी थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इन लड़कियों की उम्र कम है और इनमें से कोई भी आठवीं कक्षा से आगे की नहीं पढ़ी हैं। इनके माता-पिता को भी इस संबंध में जानकारी नहीं है।
युवक पर ऐसे मामले में शामिल होने का आरोप
छत्तीसगढ़ बजरंग दल पदाधिकारी रवि निगम ने आरोप लगाते हुए कहा कि जो युवक पकड़ा गया था, वह पहले भी इस तरह की घटनाओं में संलिप्त रहा है। आदिवासी लड़कियों का धर्म परिवर्तन करा चुका है। राज्य में धर्म परिवर्तन के खिलाफ कठोर कानून तुरंत लागू किया जाए।
मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार
दुर्ग जीआरपी ने दो ननों को मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, जहां से दो ननो समेत एक युवक को जेल भेज दिया गया था। इतना ही नहीं दो ननों और युवक की गिरफ्तारी के बाद जमानत याचिका लोअर कोर्ट के बाद सेशन कोर्ट ने खारिज कर दी थी। सेशन कोर्ट से जज अनीश दुबे ने कहा हमें यह प्रकरण सुनने का अधिकार नहीं है। यह मानव तस्करी से जुड़ा मामला था,जिसकी सुनवाई बिलासपुर की एनआईए कोर्ट में हो सकती है।
दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करने का आरोप
अब इस मामले में जमकर राजनीति हो रही है। कांग्रेस और सीपीआई के प्रतिनिधि मंडल ननों से मुलाकात कर केंद्रीय जेल पहुंचे थे। मुलाकात के बाद दोनों ही पार्टियों ने सरकार पर दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। दोनों ही राजनीतिक दलों ने प्रदेश की बीजेपी सरकार को आदिवासियों और ईसाईयों का विरोधी करार दिया है। वहीं सीपीआई वरिष्ठ नेत्री वृंदा करात ने कहा है कि झूठे केस में ननों को गिरफ्तार करके जेल में डालना अन्याय है।