नक्सली इलाके में तैनात 'सीआरपीएफ' के लिए मुसीबत बना कलेक्टर का आदेश, टूट सकता है सुरक्षा घेरा!

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 25 Jun 2020 08:41 PM IST
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सीआरपीएफ
सीआरपीएफ - फोटो : (File)

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सार

कलेक्टर ने यह आदेश दिया है कि छुट्टी, ट्रेनिंग, तबादला या किसी अन्य कार्यवश बाहर से आने वाले बटालियन के सभी अफसरों और जवानों की आरटी-पीसीआर सैंपलिंग जांच राज्य मुख्यालय रायपुर में होगी...

विस्तार

छत्तीसगढ़ के जिला 'दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा' के कलेक्टर की तरफ से जारी एक आदेश सीआरपीएफ के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। इसके चलते नक्सल प्रभावित क्षेत्र में लंबे समय से तैनात सीआरपीएफ का सुरक्षा घेरा टूट सकता है।
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दरअसल, कलेक्टर ने यह आदेश दिया है कि छुट्टी, ट्रेनिंग, तबादला या किसी अन्य कार्यवश बाहर से आने वाले बटालियन के सभी अफसरों और जवानों की आरटी-पीसीआर सैंपलिंग जांच राज्य मुख्यालय रायपुर में होगी।
इसके बाद ही वे जिले में प्रवेश कर सकते हैं। अनेक कर्मी ऐसे भी हैं, जिनके रास्ते में रायपुर नहीं पड़ता। वे वाया जगदलपुर होते हुए दंतेवाड़ा पहुंच जाते हैं। जैसे उड़ीसा, सुकमा और तेलंगाना से आने वाले कर्मियों के लिए तो कलेक्टर का यह आदेश एक बड़ी मुसीबत बन जाएगा।
अलग-अलग समूह में जब ये जवान रायपुर जाएंगे तो उनका सुरक्षा घेरा टूटने की आशंका बनी रहेगी। चूंकि दंतेवाड़ा इलाका नक्सलियों का गढ़ माना जाता है।
 
सीआरपीएफ के एक अधिकारी के अनुसार, जिला कलेक्टर का यह आदेश किसी भी तरह से जायज नहीं कहा जा सकता। दंतेवाड़ा जाने के लिए दो ट्रांजिट सेंटर हैं। एक रायपुर और दूसरा जगदलपुर।

अभी तक जो नियम था, उसके तहत बाहर से आने वाले जवान व अधिकारी सीधे अपने जिले में आकर जांच कराते थे। यदि किसी कर्मचारी में कोरोना वायरस से संबंधित कोई लक्षण दिखाई पड़ता तो उसे जिला अस्पताल या क्वारंटीन सेंटर में ले जाया जाता था।

इससे जवानों को कोई दिक्कत नहीं होती थी। एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन से जवानों को सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते हुए उनकी बटालियन तक पहुंचा दिया जाता था। इस दौरान सुरक्षा का अतिरिक्त घेरा जवानों के साथ रहता था।

अब कलेक्टर के आदेशों ने जवानों और अफसरों को परेशानी में डाल दिया है। हर जवान या अधिकारी के लिए रायपुर जाना संभव नहीं है।

इसके लिए उसे बहुत लंबा सफर तय करना पड़ेगा। दंतेवाड़ा, जगदलपुर और सुकमा में नक्सलियों का इंटेलिजेंस नेटवर्क भी खासा मजबूत है। वे जवानों की आवाजाही पर नजर रखते हैं।
 
रायपुर में कोरोना टेस्ट कराने के बाद ही सीआरपीएफ कर्मियों को दंतेवाड़ा में प्रवेश करने देना, यह शर्त जवानों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। जिन लोगों के रूट में रायपुर नहीं है, वे क्या करेंगे।

उड़ीसा, तेलंगाना वाले जगदलपुर होकर आते हैं ।उन्हें रायपुर कौन ले जाएगा। रायपुर में इतने लोगों को, एसओपी के मुताबिक ठहरने की जगह कौन और कैसे देगा। क्या यह आदेश राज्य सरकार के पूर्व आदेश की अवहेलना नहीं है।

वहीं आदेश को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस तरह के आदेश जारी करने से पहले मुख्यसचिव और डीजी या फिर आईजी लेवल पर समन्वय बैठक होनी चाहिए।

इन-रूट लोगों की जिम्मेदारी कौन लेगा, उन्हें क्या वापस रायपुर भेजा जाएगा।

सीआरपीएफ के एक कर्मी बताते हैं, क्या दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के ऊपर सीआरपीएफ एक बोझ है। क्या केंद्र सरकार के निर्देशों का कोई महत्व नहीं है। क्या इस तरह के एक तरफा फैसले से पहले सभी विभागों से चर्चा नहीं करनी चाहिए।
 
इस बाबत रायपुर सेक्टर के सीआरपीएफ आईजी प्रकाश डी. कहते हैं कि अगर ऐसा कोई आदेश जारी हुआ है तो संबंधित अधिकारी से बात करेंगे। जवानों की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होगा।
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