{"_id":"65b25bd0f79d585f5509e0d9","slug":"chherchhera-festival-celebrated-with-great-pomp-in-chhattisgarh-2024-01-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"छेरछेरा महापर्व: छत्तीसगढ़ में धूमधाम से मनाया गया त्योहार, सभी ने किया अन्नदान; लोगों ने किया सुआ नृत्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छेरछेरा महापर्व: छत्तीसगढ़ में धूमधाम से मनाया गया त्योहार, सभी ने किया अन्नदान; लोगों ने किया सुआ नृत्य
Thu, 25 Jan 2024 06:32 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही
Published by: श्याम जी.
Updated Thu, 25 Jan 2024 06:32 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ में महापर्व छेरछेरा धूमधाम से मनाया जा रहा है। गांवों में बच्चे-बड़ों की टोली घर-घर जाकर छेरछेरा त्योहार का दान ले और दे रहे हैं। इस अवसर पर पारंपरिक सुआ नृत्य और डंडा नृत्य भी गांव-गांव में किया जा रहा है।
विज्ञापन
डंडा नृत्य
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
छत्तीसगढ़ का महापर्व छेरछेरा धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के गांवों में बच्चे-बड़ों की टोली घर-घर जाकर छेरछेरा त्योहार का दान ले और दे रहे हैं। इस मौके पर पारंपरिक सुआ नृत्य और डंडा नृत्य भी गांव-गांव में देखने को मिल रहा है।
विज्ञापन
धान की खेती पूरी होने के बाद धान की मिसाइ कर उसे घर में सुरक्षित रखने के बाद मनाया जाने वाला अन्नदान का महापर्व छेरछेरा की धूम जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रही है। पूस माह की पूर्णिमा को छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पुन्नी या छेरछेरा त्योहार के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार तब मनाया जाता है, जब किसान अपने धान की नई फसल को काटकर उसका घरों में भंडारण कर चुके होते हैं। इसी भंडारित धान में से अन्नदान करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही हैं।
विज्ञापन
ग्रामीण टोली बना-बनाकर घर-घर जाकर अन्नदान लेते हैं। घर के बाहर आवाज लगते हैं 'माई छेरछेरा कोठी के धान ला हेर हेरा'। लगातार घर के बाहर इस तरह की पुकार करने के बाद घर की महिलाएं अन्नदान करती हैं। अन्नदान में देरी होने पर टोली के लोग 'अरण-बरन कोदो दरन, जब्बे देबे तब्बे तरन' की पुकार लगते हैं, जिसका मतलब है जब अनाज मिलेगा तभी यहां से जाएंगे। इस दिन शाकंभरी देवी और अन्नपूर्णा देवी की पूजा की जाती है, जो अनाज की देवी हैं।
विज्ञापन