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छत्तीसगढ़: नक्सल प्रभावित बस्तर में तेजी से विकास, सड़कों-पुलों के अलावा सुरक्षा बलों के 28 कैंप बने

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 28 May 2021 07:56 PM IST

सार

छग का बस्तर देश में नक्सली गतिविधियों के लिए चर्चित रहा है। छत्तीसगढ़ की मौजूदा कांग्रेस सरकार ने जिले में विकास का दावा किया है। 
 
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल - फोटो : ANI

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विस्तार

छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर जिले के तेजी से विकास में जुटी है। पिछले दो वर्षों में सड़कों, पुलों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा सुरक्षा बलों के लिए 28 शिविर बनाए गए हैं, ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
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छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार बस्तर के दुर्गम नक्सल प्रभावित इलाकों, जहां चलना भी मुश्किल था, वहां अब सड़क, बिजली की आपूर्ति, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास किया गया है।  बयान में कहा गया है कि विकास कार्यों को गति देने के लिए पिछले दो वर्षों में बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों में 28 सुरक्षा बलों के शिविर बनाए गए हैं। इन सुविधाओं की स्थापना के साथ, विकास कार्यों में तेजी आई है


अब तक 21 सड़कें बनीं
भाजपा के 15 साल के शासन के बाद राज्य में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद दिसंबर 2108 से अब तक माओवादी प्रभावित इलाकों में 21 सड़कें बन चुकी हैं, जबकि दूर-दराज के इलाकों को करीब 700 किलोमीटर सड़कों के जाल से जोड़ा जा रहा है। इनमें बीजापुर-आवापल्ली-जगरगुंडा, नारायणपुर-पल्ली-बारसूर, अंतागढ़-बेदमा, चिंतानपल्ली- नयापारा, चिंतल नर-मदई गुडा, कोंटा-गोल्ला पल्ली सड़कें आदि शामिल हैं।

लॉकडाउन में बनाई 450 किमी सड़कें
बयान में कहा गया है कि बस्तर के अति नक्सल प्रभावित इलाकों में कोरोना के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान करीब 450 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। छिंदनार गांव में इंद्रावती नदी पर बने एक पुल के इस साल जून के अंत तक काम करने की उम्मीद है, जिससे दंतेवाड़ा से अबूझमाड़ के जंगलों तक पहुंच की अनुमति मिलेगी, जिससे दूसरी तरफ के कई गांवों तक पहुंच होगी।

इंद्रावती नदी पर चार पुल बन रहे
पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर रेंज) सुंदरराज पी ने कहा कि सुरक्षा बलों के नए शिविरों की स्थापना से आदिवासियों का जीवन बदल गया है। इंद्रावती नदी पर चार पुल बन रहे हैं। आजादी के बाद से, इंद्रावती नदी के 200 किलोमीटर के खंड पर केवल तीन पुल थे, जो अगले साल तक बढ़कर सात हो जाएंगे। इसी तरह, पिछले 30 साल से बंद पल्ली-बरसूर, बसागुड़ा-जगरगुंडा और उसूर-पमीद सड़कों को सुरक्षा बलों की मदद से खोला जा रहा है।

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