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छत्तीसगढ़ : झीरम घाटी कांड की जांच रिपोर्ट हुई लीक, खुले लिफाफे में सीएम ऑफिस को मिले टॉप सीक्रेट दस्तावेज
Sun, 14 Nov 2021 04:37 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sun, 14 Nov 2021 04:37 AM IST
सार
छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि जब झीरम घाट कांड की जांच रिपोर्ट राज्यपाल के दफ्तर से मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंची तो लिफाफा खुला हुआ मिला था। इससे रिपोर्ट के लीक होने की आशंका को बल मिलता है।
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रविंद्र चौबे
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
राजधानी रायपुर के कांग्रेस दफ्तर में प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू और कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हैरान करने वाले खुलासे किए हैं। रविंद्र चौबे ने बताया कि प्रदेश के सबसे बड़े नक्सल हमले झीरम घाट कांड की जांच के टॉप सीक्रेट दस्तावेजों को लेकर अफसरों ने लापरवाही की है।
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उन्होंने कहा कि जब झीरम घाट कांड की जांच रिपोर्ट राज्यपाल के दफ्तर से मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंची तो लिफाफा खुला हुआ मिला था। इससे रिपोर्ट के लीक होने की आशंका को बल मिलता है। जब सीएम ऑफिस से खुले लिफाफे की रिपोर्ट को वापस लौटा दिया गया। बाद में इस सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज भेजे गए।
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प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि 28 मई 2013 को जस्टिस प्रशांत मिश्रा की अगुवाई में जांच कमेटी बनाई गई थी। इस दौरान तीन महीने में रिपोर्ट देने कहा गया, लेकिन तय सीमा में जांच नहीं हो पाई। लगातार तारीख पर तारीख बढ़ती चली गई। कम से कम 20 बार तारीख बढ़ाई गई। जांच आयोग ने 23 सितंबर 2021 को राज्य सरकार को पत्र लिखकर मांग की आयोग का कार्यकाल और बढ़ाया जाए।
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अचानक 6 नवंबर 2021 को आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को दी। आयोग ने नियम के विपरीत रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी हैं, जबकि रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जानी थी। भाजपा नेता कांग्रेस नेताओं को कहते हैं कि वो डर रहे हैं, लेकिन हम क्यों डरेंगे, क्योंकि हमने तो अपने बड़े नेता को इस कांड में खोया है।
हमने बार-बार कहा इस कांड में रचा गया षड्यंत्र
कृषि मंत्री चौबे ने कहा कि झीरम घाटी कांड की रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपने के बाद भाजपा को लगता हैं कि बड़ा मामला हाथ लग गया है। डी. पुरंदेश्वरी और डॉ. रमन सिंह कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगा रहे हैं कि हम कुछ छिपाना चाहते हैं। हमने बार-बार कहा है और आज भी कह रहे हैं षड्यंत्र रचा गया है। इस राजनीतिक हत्याकांड के पीछे षड्यंत्र में कौन शामिल है? उसका सामने आना जरुरी है।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के माथे पर लगा कलंक का टीका
झीरम नरसंहार तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के माथे पर लगा कलंक का टीका है। डॉ. रमन सिंह इस कलंक से मुक्त नहीं हो सकते। वे इतने भयाक्रांत क्यों हैं? हम चाहते हैं कि इस षड्यंत्र के पीछे कौन है सामने आए? षड्यंत्र के पीछे किसका हाथ हैं? वह सामने आना चाहिए। उद्देश्य हमारा यही है कि जांच सही हो इसलिए हमने आयोग बनाया है ।