छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पीलिया पर मांगा जवाब

टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 06 Jun 2014 12:29 PM IST
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छत्तीसगढ़ में फैले पीलिया को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मुकेश कुमार देवांगन की याचिका पर सुनवाई करते हुये जस्टीस पी. एस. कोसी और जस्टीस सीबी बाजपेयी की पीठ ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव, सचिव स्वास्थ्य विभाग, सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, सचिव जलसंसाधन विभाग को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है।
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सीजीखबर के अनुसार रायपुर के लाखेनगर के रहने वाले मुकेश कुमार देवांगन की गर्भवती पत्नी की मृत्यु पीलिया से हो गई थी।
उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि पीलिया जैसी बीमारी के शिकार अधिकांश लोग बेहद गरीब हैं। यहां तक कि याचिकाकर्ता ने 3.50 लाख रूपये का कर्जा लेकर अपनी पत्नी को बचाने की कोशिश की और वह आज तक अपना कर्ज चुका नही पाया है।
अधिवक्ता रजनी सोरेन द्वारा दायर की गई इस याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में में पीलिया यानी हेपेटाइटिस ई से 50 से ज्यादा मौते हुई है और रायपुर, दुर्ग, जांजगीर-चांपा और बिलासपुर जिले में हजारों लोग इससे प्रभावित हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हेपेटाइटिस ई मल के कारण पीने का पानी दूषित होने से होता है। छत्तीसगढ़ में जहां ये महामारी फैली है, वहां सीवेज और पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था बहुत खराब होने के है। सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल गया है। पाइप लाईन में लिकेज, शौचालयों का अभाव इसके प्रमुख कारण है।

याचिका में कहा गया है कि महामारी फैलने के बाद सरकार संतोषजनक नियंत्रण नही कर पाई है। ये बीमारी गर्भवती महिलाओं के लिए घातक होती है। बहुत-सी गर्भवती महिलाओं की मौत पीलिया (हेपेटाइटिस ई) से हुई है। जब भी मातृत्व मृत्यु होती है तो यह सरकार की जिम्मेदारी है कि मातृत्व मृत्यु ऑडिट कराये ताकि भविष्य में और मृत्यु न हो और मृत्यु का सही कारण पता चल सके।

सुप्रीम कोर्ट एवं विभिन्न हाईकोर्ट का उल्लेख करते हुये कहा गया है कि स्वच्छ पानी की उपलब्धता को मौलिक अधिकार घोषित किया है और जल सम्बधी बीमारियों से हुई मौत के कई मामलों में याचिकाकर्ताओं को मुआवजा देने का आदेश दिया है।

याचिका में पीलिया से प्रभावित लोगो, विशेष कर गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर मुफ्त ईलाज उपलब्ध कराने के अलावा एक कमेटी का गठन करने की मांग की गई है, जो महामारी फैलने के कारणो का विश्लेषण करे और इसकी रोकथाम, पानी व सीवेज की व्यवस्था में सुधार के लिए उचित अनुशंसा कर सकें।

पीलिया को लेकर दायर इस याचिका में महामारी फैलने के लिए दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही करने, सभी मृतकों के परिजन को सरकार द्वारा 20 लाख रूपये का मुआवजा देने और प्रभावित लोगो को 5 लाख का मुआवजा देने की मांग की गई है। इसके अलावा शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं होने तक क्लोरिन की गोलियों का लगातार वितरण करने के साथ-साथ लोगों में महामारी को लेकर जागरुकता फैलाने का काम किया जाये।
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